भौतिक व रसायन शास्त्र के नवीनतम ज्ञान का जीवन और पर्यावरण के साथ संतुलन हो - OTA BREAKING NEWS

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Wednesday, 26 February 2020

भौतिक व रसायन शास्त्र के नवीनतम ज्ञान का जीवन और पर्यावरण के साथ संतुलन हो


वैश्य आर्य कन्या काॅलेज में भौतिक व रसायन शास्त्र विभाग द्वारा भौतिक व रासायनिक विज्ञान में हाल के रूझान विषय पर एक दिवसीय नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। संगोष्ठी को उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा के सौजन्य से सम्पन्न कराया गया। संगोष्ठी में तीन सत्रों में करीब 100 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए व अनेक शिक्षाविदों द्वारा अपने विचार व्यक्त किए गए। सेमिनार का मुख्य उद्देष्य भौतिक व रासायनिक विज्ञान में आधुनिक तकनीक, खोज व ज्ञान का हमारे पर्यावरण व आधुनिक जीवन शैली पर पड़े प्रभाव का मूल्यांकन का रहा। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे डाॅ. मार्कण्डेय आहुजा, वीसी गुरूग्राम यूनिवसिर्टी ने कहा कि सारे अविष्कार, खोज मनुष्य के दिमाग की उपज है। हम अपने सकारात्मक दृष्टिकोण, आवष्यकता, जिज्ञासा, संघर्ष के लिए समाज को नई दिशा देने के लिए अविष्कारों को जन्म दें। उन्होंने न्यूटन, डाॅल्टन, एडीसन, कैपलर, विक्रम साराभाई, होमी जहांगीर बाबा के अविष्कारों का हवाला देते हुए कहा कि हमारी खोज मानवता की सेवा के लिए हो। हमारी संवेदनाएं मरे नहीं बल्कि समाज हित के लिए उनका प्रयोग हो।

आज भारतीय अनुसंधान में विषलेषण व अवलोकन की यथार्थता की आवश्यकता

दूसरे मुख्य वक्ता डाॅ. राजेश कुमार मलिक सहायक प्रोफेसर रसायन शास्त्र विभाग महर्षि दयानन्द विष्वविद्यालय, रोहतक ने परमाणु चुम्बकीय अनुनाद के अकार्बनिक रसायन शास्त्र में उपयोग पर अपने विचार रखे। इसमें पदार्थो द्वारा अवषोषित विधुत चुंबकीय विकिरणों के स्पेक्ट्रमों का अध्ययन किया जाता है। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रदीप कौशिक एचसीएस ने कहा कि भारत देश में विज्ञान व धर्म का अनूठा सामजस्य है। हमारे अनुसंधान मौलिक व नवाचार से पूर्ण हों। हम सिद्धांतों में बदलाव लाकर अनुसंधान को नई दिशा दे सकते हैं। आज भारतीय अनुसंधान में विषलेषण व अवलोकन की यथार्थता की आवश्यकता है।

साेलर ऊर्जा व लेजर तकनीक
के उपयाेग की दी जानकारी


मुख्य वक्ता डाॅ. सुरेन्द्र कुमार मलिक, प्रिंसिपल एआईजेएचएम काॅलेज रोहतक ने विज्ञान का दैनिक जीवन में महत्व बताते हुए साेलर ऊर्जा व लेजर तकनीक के उपयोग की चर्चा की। जीवन में आई चुनौतियों पर्यावरण असंतुलन, कार्बन उत्सर्जन की बढ़ती दर, ज्यादा बिजली खपत, बाजार विस्तार, प्रदूषण में वृद्धि पर अपने विचार रखे। सतत् मानव वृद्धि, स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र अर्थव्यवस्थाओं के जोखिम कम करने हेतु हमें वर्ष 2030 के सतत विकास के एजेंडे को लागू करना होगा। ऊर्जा के स्त्रोत लेजर के चिकित्सा में बढ़ते उपयोग व इसकी तीव्रता पेटा-बाईटस के बारे में बताया।

बहादुरगढ़ के वैश्य आर्य कन्या कॉलेज में सेमिनार में सम्मानित करते हुए।



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