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Friday, 7 February 2020

अब घोड़ों में होने वाले संक्रामक रोग, खून की कमी की चंद मिनटों में होगी जांच, वैज्ञानिकों ने तैयार की किट


प्रदेश के पशुपालकों के लिए खुशखबरी है। अब चंद मिनट के अंदर ही घोड़ों और गधों में होने वाले संक्रामक रोग रक्त अल्पता यानि खून की कमी का पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों की टीम ने विशेष किट तैयार की है। यही नहीं किट को बेचने के किए हैदराबाद की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ अनुबंध किया है। जल्द ही किट मार्किट में आ जाएगी।

केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के निदेशक और आईसीएआर पशु विज्ञान के उपनिदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस सिंगा ने बताया कि खून की कमी के कारण कई बार घोड़े और गधे के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। वहीं पीलिया से भी वह कई बार ग्रस्त हो जाता है। यही नहीं कई बार घोड़े की मौत भी हो जाती है। खून की कमी यानी रक्त अल्पता का पता समय पर लगाने के लिए संस्थान के वैज्ञानिक विशेष प्रकार की किट तैयार करने में लगे हुए थे। कई सालों की मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने एलाइजा किट तैयार कर ली है। जिससे रक्ताल्पता यानी खून की कमी का पता लगाया जा सकेगा। डॉ. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि किट तैयार करने वाले वैज्ञानिकों को जल्द सम्मानित किया जाएगा। किट को बाजार में उतारने के लिए हैदराबाद की कंपनी से अनुबंध किया गया है।

जानिए... किट से कैसे होती है घोड़ांे की जांच


केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सिंगा के अनुसार सबसे पहले संदिग्ध घोड़े-गधे का खून का सैंपल लिया जाता है। इन सैंपल के सिरम निकालकर उसे एलाइजा किट की प्लेट पर रखते हैं। कई प्रकार के केमिकल एजेंट मिलाए जाते हैं। इसके बाद रिपोर्ट आती है।

यह होता है रक्त अल्पता रोग

रक्ताल्पता (रक्त+अल्पता) का साधारण मतलब रक्त (खून) की कमी है। यह लाल रक्त कोशिका में पाए जाने वाले एक पदार्थ (कण) रूधिर वर्णिका यानि हीमोग्लोबिन की संख्या में कमी आने से होती है। हीमोग्लोबिन के अणु में अनचाहे परिवर्तन आने से रक्ताल्पता के लक्षण प्रकट होते हैं। हीमोग्लोबिन पूरे शरीर में ऑक्सीजन को प्रवाहित करता है और इसकी संख्या में कमी आने से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति में भी कमी आती है। इसके कारण थकान और कमजोरी महसूस कर सकता है। पीलिया भी हो जाता है।

रोग के लक्षण

}त्वचा का सफेद दिखना।

}जीभ, नाखूनों एवं पलकों के अंदर सफेदी।

कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट।

}चक्कर आना-विशेषकर लेटकर एवं बैठकर उठने में।

}बेहोश होना।

}सांस फूलना।

}हृदयगति का तेज होना।

}चेहरे एवं पैरों पर सूजन दिखाई देना।



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