एसए जैन कॉलेज में कॉमर्स फर्स्ट बैच के ‘स्टूडेंट्स’ ने दोहराई सुनहरी यादें - OTA BREAKING NEWS

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Monday, 3 February 2020

एसए जैन कॉलेज में कॉमर्स फर्स्ट बैच के ‘स्टूडेंट्स’ ने दोहराई सुनहरी यादें


आत्मानंद जैन (एसए) कॉलेज में वर्ष 1970 में कॉमर्स के पहले बैच के 24 स्टूडेंट्स सोमवार को कॉलेज में इकट्ठे हुए। पहले बैच की गोल्डन जुबली इस अंदाज में मनाने की तैयारी सितंबर में शुरू हुई थी। जब इसी बैच के स्टूडेंट रहे एसबीआई बैंक से चीफ मैनेजर पद से रिटायर्ड उमेश उप्पल ने दोस्त श्रवण अग्रवाल, रमेश नारंग और वृद्धि चंद जैन से बात करके प्लानिंग की। बात आगे बढ़ी तो कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. आभा बंसल से बैच में पढ़े दोस्तों के एड्रेस लिए। सभी के फोन नंबर जुटाकर संपर्क किया। इन प्रयासों के बदौलत 50 साल बाद एक मंच पर जुटे तो वो सुनहरी दिन दोबारा जीने का मौका मिला।

सारे दोस्त एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कॉलेज में घूमे। अब बहुत कुछ बदल चुका है लेकिन बहुत कुछ ऐसा मिला जिससे पुरानी यादें ताजा हुईं। इस बैच के स्टूडेंट्स बिजनेसमैन, सीए, बैंक और प्राइवेट कंपनी के बड़े पदों पर रहे हैं। कई का अपना बिजनेस है। दिल्ली, पंजाब, हिमाचल व हरियाणा से पहुंचे ये दोस्त प|ियों को साथ लाए थे। एक-दूसरे से खूब मजाक किए और जीवन साथी को लेकर चॉइस की तारीफें भी की। कॉलेज प्रबंधक कमेटी और प्रिंसिपल डॉ. आभा बंसल और बैच के टीचर रहे प्राे. ओपी शर्मा पुराने स्टूडेंट की बात सुनकर खूब हंसे। मंच संचालन कर रहे एसबीआई के रिटायर्ड चीफ मैनेजर उमेश उप्पल ने बताया कि एसए जैन कॉलेज और एसडी कॉलेज के बीच जब कभी इंटर कॉलेज प्रतियोगिता में मुकाबला होता था तो एसडी कॉलेज से तरफ से सुषमा स्वराज (विदेश मंत्री रहीं) डिबेट में हिस्सा लेती थीं। सुषमा ने डिबेट कभी दूसरों को जीतने नहीं दिया। उप्पल मंच पर बोल रहे थे तो मजाकिया अंदाज में शांतिलाल सेठिया बोले-हमें अपनी चॉइस (जीवनसाथी) तो दिखाए। इस पर नीलू मंच पर आईं जो अपने जमाने में हरियाणा क्रिकेट टीम में ओपनर थीं और नॉर्थ जोन तक खेली हैं। उनका परिचय कराते हुए उप्पल बोलें- मैं तो इनकी हर बॉल पर बोल्ड ही होता रहा हूं। इस मौके पर मैनेजमेंट कमेटी प्रधान एडवोकेट कुलदीप कुमार जैन, सेक्रेटरी सुरेंद्र जैन, फाइनेंस सेक्रेटरी सूर्यकांत जैन, जॉइंट सेक्रेटरी सुनील जैन, कॉमर्स एचओडी प्राे. मुकेश त्रेहन, कीमती राय मित्तल, जीके जैन, हरपिंद्र सिंह बिंद्रा, रवि सूद, गुलशन कुमार, चंद्र प्रकाश आहुजा मौजूद रहे। डॉ. कविता सिंगला ने मंच संचालन किया।

अाॅस्ट्रेलिया से नहीं अा सके सुखसरन सिंह, वीडियो काॅल कर दाेस्तों ने दी गोल्डन जुबली की बधाई

बैच में पढ़ने वाले सुखसरन सिंह अभी आॅस्ट्रेलिया में है। वह गोल्डन जुबली में नहीं अा सके। कार्यक्रम में ही रमेश नारंग, कॉमर्स विभाग के एचअाेडी प्राे. मुकेश त्रेहन अाैर कीमती राय अग्रवाल ने उनके साथ वीडियो काॅल कर बात की अाैर गाेल्डन जुबली पर सभी दाेस्ताें के इकट्ठा हाेने की बात बताई ताे उन्हाेंने सभी काे इसके लिए बधाई दी।

काॅलेज ने बहुत कुछ दिया, आज
उसी सीख से समाजसेवा शुरू की


सिटी सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी सेक्टर-10 के प्रधान कीमती राय अग्रवाल इलाहाबाद बैंक से सीनियर मैनेजर पद से रिटायर्ड हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज से काफी सीख मिली। टीचर्स ने दोस्त समझकर पढ़ाया। उनके दोस्त कई बार तो टीचर को ही आराम करने के लिए हॉस्टल की चाबी दे देते थे। वह अब सोसाइटी बनाकर लोगों की सेवा कर रहे हैं।

एसबीअाई से रिटायर्ड रमेश नारंग ने खूब हंसाया

एसबीअाई से रिटायर्ड सेक्टर-1 निवासी रमेश नारंग ने खूब हंसाया। नार्मली इंसान दिन में 450 बार हंसता है। मगर आज इस तनाव भरी जिंदगी में 50 बार भी नहीं हंसता। उन्होंने कार्यक्रम में हंसने की तीन विधियां बताई। पहले हाथ ऊपर कर खुलकर हंसने, दूसरा तालियां बजाते और तीसरा मुंह बंद कर हंसना। उन्होंने हंसने की चौथी विधि नहीं बताई क्योंकि वह बचपन में जमीन पर लेटकर ही की जा सकती है। इस दौरान सभी खूब हंसे। अंत में सभी ने बैच को पढ़ाने वाले टीचर व दो दोस्तों का निधन होने पर दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी।

जब मौसम अच्छा होता था तो घग्घर में जाकर कबड्डी खेलते थे: श्रवण अग्रवाल


सिटी में कपड़ा व्यापारी श्रवण अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज में बंक मारने के बहाने ढूंढते थे। जब मौसम अच्छा होता था तो घग्घर नदी में जाकर कबड्डी खेलते थे। बैच के शुरू होने पर 60 स्टूडेंट थे। फाइनल तक 23 रह गए थे।

दिल्ली से आए बिजनेसमैन मनमोहन जैन ने बताया कि उनके पास स्कूटर होता था, 5 रुपए में टंकी फुल करवाकर शहर के घूम चक्कर काटते थे।

क्रिएशन सेनेटरी कंपनी से प्रेजीडेंट फाइनांस पद से रिटायर्ड हुए चंद्रप्रकाश आहुजा ने बताया कि हॉस्टल में रहने के दौरान बंक मारकर सीधा कैंट रेलवे स्टेशन पर डीलक्स ढाबे में खाना खाने के लिए जाते थे।

काॅलेज में पढ़कर कई मंत्री, अफसर व सफल बिजनेसमैन बने

एसए जैन कॉलेज की स्थापना 1938 में श्री गुरु विजय वल्लभ सूरीश्वर महाराज ने अपने गुरु श्री आत्मानंद जैन महाराज की याद में की थी। इस दौरान पंजाब के लुधियाना और दिल्ली के बीच कोई कॉलेज नहीं होता था। एसए जैन कॉलेज की स्थापना होने पर हिमाचल प्रदेश तक के बच्चे यहां पढ़ने आते थे। कॉलेज में हॉस्टल भी बनाया गया था। 1967 में यहां कॉमर्स शुरू हुई थई। लोकसभा स्पीकर व गवर्नर रहे सूरजभान, पूर्व केंद्रीय मंत्री आईडी स्वामी, पंजाब के पूर्व मंत्री मदनमोहन मित्तल, पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जज आरएन मित्तल, आईएएस राजेश खुल्लर, पूर्व जस्टिस एमएस लिब्राहन, जस्टिस नवाब सिंह इसी कॉलेज में पढ़े हैं। यहां से हाईकोर्ट के 5 जज, 5 सेशन व जिला जज, 1 डीजीपी, 1 एडीजीपी, 5 बड़े सैन्य अफसर, 11 आईएएस व आईपीएस निकले हैं।

शरारती इतने थे कॉलेज से घर पहुंचे थे 30 टेलीग्राम: सेठिया

हम चंडीगढ़ रहते थे। यहां पढ़ने के लिए हॉस्टल में रहता था। कॉलेज टाइम में मैंने सबसे ज्यादा शरारतें की होंगी। हमारी शरारतों की वजह से ही कॉलेज की तरफ से मेरे पिताजी को 30 टेलीग्राम लिखे गए थे। हम टीचर का सम्मान करते थे लेकिन मौका मिलने पर परेशान करने से भी नहीं चूकते थे। हॉस्टल में भी दोस्तों के खूब मजे लेते थे। जो घरों से खाने-पीने का सामान लाते थे, चुपके से हम खा जाते थे। दोस्तों के मजाकिया नाम रखे हुए थे।

शांतिलाल सेठिया, बिजनेसमैन (पंचकूला से प|ी कमला सेठिया के साथ आए)

बंक मारकर कैंट में फिल्म देखने जाते थे, क्योंकि वहां स्टूडेंट्स को टिकट में छूट मिलती थी: रामप्रसाद शर्मा

1970 में जब वह कॉलेज में पढ़ते थे तब पंजाब रोडवेज की एक बस हिमाचल से चलती थी। या उन्हें पठानकोट से ट्रेन में आना पड़ता था। रास्ता कच्चा होता था। बस में चंडीगढ़ तक आने में 11 घंटे लग जाते थे। यही हॉस्टल में रहते थे। बाथरूम भी नहीं होते थे। हम तो तालाब में भी नहा आते थे। जब हैंडपंप पर नहाते थे तो साबुन शरीर पर जम जाती थी। दोस्तों के साथ कॉलेज से एक साथ बंक मारते थे और फिल्म देखने के लिए कैंट के निगार, कैपिटल व निशात सिनेमा में जाते थे, क्योंकि वहां स्टूडेंट्स को टिकट में छूट मिलती थी।

रामप्रसाद शर्मा, अध्यक्ष मां बृजेश्वरी मंदिर पुजारी सभा, कांगड़ा।

सिटी के एसए जैन काॅलेज की गोल्डन जुबली पर पहुंचे 1970 बैच के स्टूडेंट्स।

50 साल बाद मिले अपने टीचर प्राे. अाेपी शर्मा के पैर छूककर अाशीर्वाद लेते सिटी के कपड़ा व्यापारी श्रवण अग्रवाल।



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