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Thursday, 13 February 2020

जर्जर हॉस्टल भवन की मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग को लेकर नर्सिंग छात्राओं ने शुरू किया धरना


चौ.बंसीलाल नागरिक अस्पताल स्थित 47 साल पुराने नर्सिंग हॉस्टल के जर्जर भवन की छत्त का पलस्तर गिरने से आंदोलन कर रहीं छात्राएं गुरुवार को ओपीडी के बाहर अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गई और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इससे अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा। छात्राओं के समर्थन में जन संघर्ष समिति के पदाधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और छात्राओं से बातचीत की। इसके बाद समिति के पदाधिकारी सीएमओ व पीएमओ से मिले और छात्राओं की समस्या का समाधान करने की मांग की लेकिन दोनों अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि नर्सिंग छात्रावास उनके अंडर में नहीं आता है वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते है। इसके बाद समिति पदाधिकारी, छात्र नेता छात्राअाें व प्रिंसिपल के साथ डीसी से मिले लेकिन तुरंत समस्या का समाधान न मिलने पर छात्राओं ने कक्षाएं छोड़कर समस्या के समाधान तक धरना जारी रखने का फैसला लिया। नर्सिंग हॉस्टल का छह मंजिला भवन मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका है और पिछले दस दिन में चार बार हॉस्टल में बने छात्राओं के कमरों में छत का पलस्तर गिर चुका है।

इसके अलावा आए दिन दीवारों व पिलरों से भी पलस्तर गिरता है। ऐसे में हॉस्टल में रहना छात्राओं के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। स्वास्थ्य विभाग किसी तरह की वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं कर रहा हैं। सीएमअाे डॉ. जितेंद्र कादयान व पीएमओ डॉ. मंजू कादयान ने छात्राओं व समिति पदाधिकारियों से दो टूक शब्दों में कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसके लिए नर्सिंग छात्रावास की प्रिंसिपल को चंडीगढ़ स्थित शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मिलना होगा वहीं समस्या का समाधान कर सकते हैं।

सीएमओ व पीएमओ से कोई आश्वासन न मिलने पर छात्राएं समिति पदाधिकारी बिमला घनघस, किसान नेता मास्टर शेर सिंह व एसएफआई नेता क्रांति डीसी अजय कुमार से मिले। डीसी ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में बीएंडआर व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मीटिंग लेंगे तथा अधिकारियों के साथ वह स्वयं जर्जर बिल्डिंग का निरीक्षण करेंगे। बीएंडआर विभाग के अधिकारी अगर बिल्डिंग को कंडम घोषित करेंगे तो छात्राओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाई जाएगी।

इसलिए जर्जर बिल्डिंग में रहने को मजबूर छात्राएं


{निदेशक स्वास्थ्य विभाग सेवाएं चंडीगढ़ से लिखित स्वीकृति के बाद ही स्वास्थ्य विभाग छात्राओं के लिए रहने की वैकल्पिक व्यवस्था कर सकता है।

{अभी तक निदेशक से इसकी स्वीकृति नहीं मिली है।

{हॉस्टल बिल्डिंग में न रहकर छात्राएं प्रशिक्षण के समय ही कक्षाओं में उपस्थित होने पर भी प्रिंसिपल सहमत नहीं है क्योंकि यह नियमों के विरूद्ध है। इसलिए छात्राएं अपने स्तर पर किसी अन्य स्थानों पर भी नहीं रह सकती है।

{वैकल्पिक व्यवस्था तक छात्राएं अवकाश पर भी नहीं रह सकती हैं क्योंकि कक्षाओं में न आने पर उनकी गैरहाजिर लगेगी। इसलिए छात्राओं के सामने जर्जर बिल्डिंग में मौत के साये में ही रहने के सिवाए स्वास्थ्य विभाग ने ओर कोई चारा नहीं छोड़ा है।

कार्रवाई करेंगे: पीएमओ


बिल्डिंग के संबंध में बीएंडआर विभाग को पत्र लिखा गया है। विभाग की तरफ से निरीक्षण के बाद ही बिल्डिंग को डैमेज घोषित किया जाएगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में हॉस्टल प्रिंसिपल को चंडीगढ़ से वैकल्पिक व्यवस्था से संबंधित स्वीकृति पत्र लेकर आना होगा। इसके बाद भी छात्राओं के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।\'\' - डॉ. मंजू कादयान, पीएमओ|


ये कहना है समिति का


जनसंघर्ष समिति के संयोजक कामरेड ओमप्रकाश, बिमला घनघस, संतोष आदि ने बताया कि छात्राअों की मांग जायज है। छात्राओं को जर्जर भवन में जान को खतरा है। उन्होंने जिला प्रशासन से कहा कि मामले को गंभीरता से ले और डीसी मामले में हस्तक्षेप कर प्रिंसिपल को चंडीगढ़ में विभाग के निदेशक से वैकल्पिक व्यवस्था करने के संबंध में स्वीकृति पत्र दिलवाए ताकि छात्राओं के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था करवाई जा सके।


ये कहना है छात्राओं का


छात्रा मंजू, मनीषा, कविता आदि ने बताया कि जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत व वैकल्पिक व्यवस्था करने तक वह आंदोलन पर रहेगी। कक्षाओं को छोड़कर वे हर रोज समस्या के समाधान तक धरने पर बैठी रहेगी। भले ही उनकी गैरहाजिर लगाए। क्योंकि वे जान का खतरा नहीं उठा सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर समस्या के समाधान की मांग की है।


प्रिंसिपल बोलीं-पत्र लेकर आएंगी

वह सोमवार को चंडीगढ़ जाएगी और विभाग से वैकल्पिक व्यवस्था से संबंधित पत्र लेकर आएगी।\'\' - महेंद्र कौर, हॉस्टल प्रिंसिपल|

सिविल अस्पताल में ये सेवाएं हो रही हैं प्रभावित


120 नर्सिंग छात्राओं के हड़ताल पर चले जाने से सिविल अस्पताल में आपताकालीन विभाग से लेकर वार्डों तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित है। नर्सिंग छात्राएं आपातकालीन विभाग के अलावा वार्डों में भी अपनी स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं प्रदान करती है। मरीजों को मरहम पट्‌टी व इंजेक्शन लगाने के अलावा मरीजों का बीपी जांचने, बेड से चद्दर बदलने व स्वास्थ्य विभाग के स्टॉफ के साथ मरीजों के उपचार के समय चिकित्सक व स्टॉफ नर्स की हैल्प के तौर पर भी अपनी सेवाएं देती है। इसके कारण अस्पताल में बने छह वार्डों के अलावा आपातकालीन विभाग में भी स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।

चौ.बंसीलाल नागरिक अस्पताल में हड़ताल कर धरने पर बैठी नर्सिंग छात्राएं।



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