सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। एसएमओ के तबादले के बाद अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की सेवाएं खत्म हो गए हैं। हांसी शहर के अलावा नारनौंद, सोरखी और सिसाय की महिलाएं उपचार के लिए यहीं आती थी।
महिला रोग विशेषज्ञ न होने से अस्पताल में सामान्य डिलीवरी की सेवाएं ही मिल पा रही हैं। बाकी महिलाओं को सीधे रेफर किया जाने लगा है। अस्पताल में एसएमओ के दो पद हैं। एक पद लंबे समय से खाली है। दूसरे पद पर डॉ. अरुणा गर्ग नियुक्त थीं। पिछले महीने उनका मंगाली तबादला हो गया। उनके तबादले के बाद से एसएमओ के दोनों पर खाली हो गए हैं। साथ ही अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की सेवाएं समाप्त हो गई हैं। कारण यह है कि उनके तबादले के बाद अस्पताल में किसी और महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं की गई है। जिससे सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को हो रही है। डॉ. गर्ग के रहते अस्पताल में 50 से अधिक की ओपीडी रहती थी। अस्पताल में कुल 13 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें दो एसएमओ और 11 एमओ शामिल हैं।
पिछले साल अगस्त के बाद से अस्पताल को कोई चिकित्सक नहीं मिला। अगस्त में जनरल सर्जन के रूप में डॉ. दीपांशु और एनीस्थिसिया स्पेशलिस्ट के रूप में डॉ. पल्लवी की नियुक्ति हुई थी। उसके बाद से अस्पताल को चिकित्सक नहीं मिला। नए चिकित्सक मिलने की बजाए चिकित्सकों की संख्या लगातार घटती जा रही है। अस्पताल में फिलहाल फिजिशियन, गायनोकोलॉजिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ और ईएनटी की जरूरत महसूस की जा रही है।
गर्भवती महिलाएं परेशान
गायनोकोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने से सिजेरियन डिलीवरी केस को सीधे रेफर किया जा रहा है। नारनौंद, सोरखी और सिसाय आदि से रेफर की जाने वाली महिलाओं को हांसी लाया जाता है। हांसी से उन्हें हिसार या अग्रोहा के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिसके चलते अधिकांश महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
दो ने नहीं किया ज्वाॅइन
सिविल अस्पताल में मरीजों के स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए सरकार ने पिछले दो साल में दो विशेषज्ञों की नियुक्ति की थी, लेकिन दोनों ने ही ज्वाॅइन नहीं किया। इनमें एक गायनोकोलॉजिस्ट और एक एनीस्थिसिया स्पेशलिस्ट थे। दोनों चिकित्सक हालांकि अस्पताल में अपनी सेवाएं नहीं दे रहे, लेकिन उनकी यहां नियुक्ति दिखाई जा रही है।
सिविल अस्पताल
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