केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा की तरह .उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच नियमित शिक्षकों से ही कराने का फैसला लिया है। इसको लेकर बोर्ड की ओर से जारी आदेश में कहा गया है। कि 10वीं-12वीं परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच इस बार केवल नियमित शिक्षक ही करेंगे। अनियमित व तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं किसी भी हाल में नहीं ली हाएगी। अगर कोई स्कूल ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिसमें आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ उसकी मान्यता तक भी रद्द की जा सकती है। बोर्ड ने इस संबंध में सभी स्कूलों से नियमित शिक्षकों की सूची मांगी गई है। सीबीएसई की नोडल अधिकारी नीलिमा जैन के अनुसार बोर्ड ने स्कूलों के लिए एफिलिएशन बॉयलॉज के नियम संख्या 14.4 के तहत सख्त नियम है कि कॉपी जांचने का काम केवल नियमित शिक्षक ही करेंगे।
कॉपियों के मूल्यांकन की भी होगी जांच| बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन की भी जांच की जाएगी। यह जांच कई स्तर पर होगी। जिसके लिए साफ्टवेयर की भी मदद ली जाएगी। शिक्षकों द्वारा की गई उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पहले उच्चाधिकारी करेंगे। इसके बाद कंप्यूटर साफ्टवेयर की मदद से इसकी जांच होगी। जिससे मूल्यांकन में किसी तरह की गड़बड़ी पकड़ में आ सके और समय पर उसमें सुधार किया जा सके।
अनियमित व तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं लेने पर आर्थिक जुर्माना के साथ-साथ रद्द हो सकती है स्कूल की मान्यता
ये है इस फैसले की वजह| सीबीएसई के अधिकांश स्कूल 10वीं और 12वीं की कॉपी के मूल्यांकन कार्य को गंभीरता से नहीं लेते हुए स्कूल में कार्यरत अस्थाई या तदर्थ शिक्षकों से ही कॉपियों का मूल्यांकन कराते हैं। जिसका असर छात्रों के प्राप्तांकों पर पड़ता है। कई बार अंकों की गड़बड़ी से परीक्षा परिणाम में उलटफेर होने की संभावना बनी रहती है। यहां तक कि मूल्यांकन सही न होने पर बोर्ड की छवि भी प्रभावित होती है। स्क्रूटनी के दौरान नंबर घटने-बढ़ने पर पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ जाती है।
सूरजकुंड रोड स्थित एक स्कूल से परीक्षा देकर बाहर निकलते छात्र। फाइल फोटो
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