अम्बाला(रवि प्रताप सिंह).हरियाणा सरकार ने हाल ही में सरकारी और सरकारी मदद से चल रहे काॅलेजोें के असिस्टेंट प्रोफेसरों को पीएचडी के आधार पर पांच इंक्रीमेंट देने के संबंध में पत्र जारी किया था।
इस पत्र के तहत वर्ष 2006 और 2015 के बीच लगे असिस्टेंट प्रोफेसरों को वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाएगा।
वेतन वृद्धि के बाद असिस्टेंट प्रोफेसरों की सैलरी में करीब 5 से 8 हजार प्रति महीने की वृद्धि होना तय है, लेकिन इस पत्र के बाद पेंच ये फंस गया कि 2009 से 2013 के बीच लगे असिस्टेंट प्रोफेसरों का वेतन उनके सीनियर्स असिस्टेंट प्रोफेसरों, जिनका चयन 2006, 2007 और 2008 में हो चुका है, उनसे अधिक हो जाएगा। इससे प्रदेश के करीब 600 से ज्यादा असिस्टेंट प्रोफेसर प्रभावित होंगे। काॅलेज टीचर्स एसोसिएशन का आरोप है कि पत्र की भाषा काफी घुमावदार है, जो बहुत से तथ्यों को स्पष्ट नहीं करती है। वैसे इंक्रीमेंट का यह मसला वर्ष 2008 से अटका हुआ था।
सुप्रीम काेर्ट के आदेशाें के खिलाफ
कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के मुताबिक, प्रदेश सरकार का यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय अपने आदेश में कह चुका है कि यदि दो कर्मचारियों की नियुक्ति एवं योग्यता समान है तो किसी जूनियर का वेतन उसके सीनियर से ज्यादा नहीं हो सकता, लेकिन सरकार अगर नए इंक्रीमेंट को लागू करती है तो अपने सीनियर के बाद में लगे असिस्टेंट प्रोफेसर का वेतन उनसे ज्यादा हो जाएगा।
इन-सर्विस पीएचडी करने वाले प्रोफेसर के साथ असमानता
एसोसिएशन का आरोप है कि सरकार इनके साथ भी अन्याय कर रही है। मसलन वर्ष 2006, 2007 और 2008 के शिक्षकों को सेवा के दौरान पीएचडी करने के बाद केवल एक या दो सैलरी इंक्रीमेंट का लाभ दिया गया है, जबकि 2009 के बाद वालों को 3 वेतन वृद्धि का लाभ दिया जा चुका है। इसलिए कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन प्रदेश सरकार से मांग करता है कि वेतन वृद्धि का लाभ 2006 के बाद लगे सभी शिक्षकों को एक समान दिया जाए।
ये कहता है यूजीसी
यूजीसी के नोटिफिकेशन में 1 जनवरी 2006 के बाद जो सहायक प्रोफेसर पीएचडी के आधार पर लगे हैं, उन्हें पांच इंक्रीमेंट मिलेंगे। वहीं, जो नेट या एमफिल के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर लगे हैं और सर्विस के दौरान पीएचडी की है तो उन्हें तीन इंक्रीमेंट मिलेंगे।
ये कहती है एसोसिएशन
हरियाणाकॉलेज टीचर्स एसोसिएशन केअध्यक्षराजबीर सिंह-असिस्टेंट प्रोफेसर का वेतन वृद्धि अपने जूनियर से अधिक हो। यह किसी भी रूप में सही नहीं है। इसलिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।
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