जिले में 25 से कम छात्र संख्या वाले राजकीय स्कूल अब बंद नहीं होंगे। पिछले दिनों निदेशालय द्वारा मांगी गई ऐसे स्कूलों की लिस्ट को रद्द कर दिया गया है। जिले में 46 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं जहां 25 से भी कम बच्चे पढ़ने आते हैं। निदेशालय की तरफ से इन स्कूलों को बंद कर पास के ही स्कूलों में इन बच्चों
को शिफ्ट करने के आदेश जारी किए गए थे।
लेकिन शिक्षक संगठनों व पंचायतों की मांग पर अब इन स्कूलों को बंद नहीं किया जाएगा। बल्कि इन स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए डीईईओ व बीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि वह पंचायत के माध्यम से अभिभावकों को राजकीय स्कूलों मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देते हुए बच्चों को राजकीय स्कूल में पढ़ाने के लिए प्रेरित क रेंगे। जिले में लोग सरकारी स्कूलों को छोड़कर निजी स्कूलों में अपने बच्चों के दाखिले ज्यादा करवा रहे हैं। यहीं कारण है कि जिले में 46 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं जहां 25 बच्चे भी पढ़ने नहीं आते। जिसके आधार पर इन सभी स्कूलों को ताला लगने वाला था। इन स्कूलों के 651 बच्चों सहित 89 टीचरों को नये सत्र से नजदीकी गांव के स्कूलों में पढ़ना व पढ़ना पड़ता। शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली से छोटे बच्चों व उनके अभिभावकों को दूर दराज के स्कूल में आने जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ती। ऐसे में ग्राम पंचायतों व शिक्षक संगठनों ने प्रदेश सरकार से इन स्कूलों को मर्ज नहीं करने की मांग की थी। मांग को पूरा करते हुए निदेशालय ने अब इन स्कूलों को मर्ज करने का फैसला वापस ले लिया है।
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