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Thursday, 19 March 2020

8 महीने की पेमेंट नहीं होने के कारण कर्मियों की सेलरी देना हुआ मुश्किल


नगरपालिका गन्नौर के पास राजस्व में कमी का खामियाजा अब लाेगाें को भुगतना पड़ सकता है। घर-घर से कचरा उठान की प्रक्रिया अब अटक सकती है। क्योंकि कचरा उठान कर रही एजेंसी काे नगर पालिका की अाेर से राशि नहीं दे जा रही है।

जिसके चलते ले लगभग 8 माह से शहर के वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने के साथ डंपिंग पाॅइंट से कूड़ा उठाकर शहर को साफ-सुथरा रखने वाली जेबीएम कंपनी को पेमेंट नहीं की गई हैं। ऐसे में जेबीएम कंपनी कभी भी डंपिंग पाॅइंट व घर-घर से कचरा उठाना बंद कर सकती हैं। इसके बाद शहर में जगह-जगह कूड़े के अंबार लग जाएंगें। जहां एक तरफ कोरोना वायरस बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की साफ-सफाई न होने पर गंदगी फैलने से हालात बिगड़ सकते हैं। नगरपालिका ऐसी स्थिति में नहीं है कि जेबीएम कंपनी का बकाया चुकता कर दें। लगभग डेढ़ साल पहले जेबीएम कंपनी ने शहर को स्वच्छ बनाने को लेकर कार्यभार संभाला था। कंपनी के कर्मचारी शहर के 17 वार्डों में डोर टू डोर जाकर कचरा कलेक्शन करने के साथ ही अलग-अलग जगहों पर बने डंप पाॅइंटों से कूड़ा उठाने का काम कर रहे हैं। इसको लेकर नगरपालिका ने पेमेंट चुकता करनी होती हैं। लेकिन पिछले करीब 8-9 माह से जेबीएम कंपनी को काम की पेमेंट नहीं मिल रही हैं। ऐसे में कंपनी को वाहनों को तेल समेत कर्मचारियों की सैलरी निकालना बेहद मुश्किल हो रहा हैं। नपा अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बाद पेमेंट नहीं हो रही है, ऐसे में जेबीएम कभी भी शहर से कूड़ा उठाना बंद कर सकती है।

नगरपालिका प्रशासन का कहना ः पैसों का हो रहा टोटा

जेबीएम कंपनी बंद कर सकती है डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन

नगरपालिका के खाते में करीब 20 लाख रुपए तक है, जबकि जेबीएम कंपनी के कई माह के लगभग 75 लाख रुपए तक हैं। ऐसे में कर्मचारियों की सैलरी के रुपए नहीं है तो जेबीएम कंपनी को कहा से दें। उन्होंने बताया कि कार्यवाहक प्रधान ने भी अपना त्याग पत्र दे दिया हैं। बजट को लेकर सरकार से मांग की जाएगी। ताकि काम सुचारू तरीके से हो सके। -नितिन वत्स, सचिव नगरपालिका।

गन्नौर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम कर रही है, लेकिन नगरपालिका की ओर से कंपनी को पिछले करीब 8-9 माह से पेमेंट नहीं मिली हैं। जोकि 75-80 लाख के आसपास बैठती हैं। उन्होंने बताया कि अगर नपा पेमेंट नहीं करेगी तो कंपनी कब तक काम करती रहेगी, ऐसे में जल्द ही कोई कदम उठाया जा सकता हैं। राजेंद्र सिंह, सीजीएम जेबीएम ग्रुप।


डीडी पावर की रहती समस्या

नगरपालिका में चेयरमैन की कुर्सी को लेकर उठक-पटक चल रही है। चेयरमैन सतप्रकाश शर्मा का मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जबकि वाइस चेयरमैन सुनील लंबू ने कार्यवाहक चेयरमैन के पद से उपायुक्त को इस्तीफा सौंप दिया हैं। ऐसे में डीडी पावर न होने पर कर्मचारियों की सेलरी तक नहीं निकलती हैं।

साल पहले जेबीएम कंपनी ने शहर को स्वच्छ बनाने को लेकर कार्यभार संभाला था। कंपनी के कर्मचारी शहर के 17 वार्डों में डोर टू डोर जाकर कचरा कलेक्शन करने के साथ ही अलग-अलग जगहों पर बने डंप पाॅइंटों से कूड़ा उठाने का काम कर रहे हैं। इसको लेकर नगरपालिका ने पेमेंट चुकता करनी होती हैं। लेकिन पिछले करीब 8-9 माह से जेबीएम कंपनी को काम की पेमेंट नहीं मिल रही हैं। ऐसे में कंपनी को वाहनों को तेल समेत कर्मचारियों की सैलरी निकालना बेहद मुश्किल हो रहा हैं। नपा अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बाद पेमेंट नहीं हो रही है, ऐसे में जेबीएम कभी भी शहर से कूड़ा उठाना बंद कर सकती है।

गन्नौर. रेलवे रोड पर िशव पार्क के पास लगा गंदगी का ढेर।



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