मानसून की तेज बारिश ने एक बार फिर से रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2018 को छोड़ दिया जाए तो इस बार जुलाई में पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। अब तक 440.6 एमएम बारिश हो चुकी है, जिसमें गुरुवार को 107.6 एमएम बारिश शामिल है। जबकि वर्ष 2018 के जुलाई में 554.2 एमएम बारिश हुई थी।
अल सुबह से शुरू हुई तेज बारिश से शहर की गलियां और सड़कें जलमग्न हो गई। सड़कें तालाब की तरह पानी से लबालब हो गई। हर माह शहर के सफाई कार्यों पर 2 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इसके अलावा करीबन डेढ़ करोड़ रुपए का सीवर का टेंडर अलग से दिया गया था। बावजूद इसके सीवर व नालों की प्रॉपर सफाई न होने का परिणाम यह रहा कि शहर में जगह-जगह जलभराव हो गया और सेक्टर-13 में कई घरों में बारिश का पानी घुस गया। सड़कों पर डेढ़ से दो फीट तक पानी एकत्रित हो गया।
सड़कों पर जलभराव से लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा। वहीं घरौंडा के कैरवाली गांव में बारिश के दौरान सुबह लगभग 7 बजे एक मकान ढह गया, जिसमें एक परिवार के तीन बच्चों सहित पांच लोग मलबे में दबे। हादसे में पांच साल की बच्ची आशु की मौके पर ही मौत हो गई। बच्ची लोहे के गाडर के नीचे दब गई थी। परिवार के अन्य 4 सदस्य घायल हो गए। मकान ढहने की खबर लगते ही गांव के लोगों ने मलबे में परिवार को निकाला। घायलों को राजकीय अस्पताल घरौंडा में दाखिल कराया गया।
श्यामल सेन पार्क के सामने लोगों के घरों में घुसा बारिश का पानी
तेज बारिश से शहर की सड़कें जलमग्न हो गई। सड़कों पर भरे पानी ने निगम के निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। सेक्टर-13 में श्यामल सेन पार्क के सामने बारिश का पानी घरों की दहलीज को लांघ गया। सेक्टर-13 में लोग बारिश का पानी घरों में घुसने से परेशान रहे। सुबह 6 बजे से पानी निकाले में जुटे रहे। महिलाओं ने घरों में घुसे पानी को दिखाते हुए प्रशासन और सरकार को कोसा। लोगों ने बताया कि पिछले 40 सालों से वे यही समस्या झेल रहे हैं।
शहर के सबसे बड़े और मुख्य नाले ने खोली पोल
शहर का मुगल कैनाल नाला सबसे बड़ा है जो पूरी तरह से ओवरफ्लो रहा। इसके अलावा रामनगर से आने वाले मुख्य नाले के भी यही हालात रहे। नालों के ओवरफ्लो होने का कारण उनकी प्रॉपर सफाई न होना है। सीवरेज व रेन वाटर ड्रेन के निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद उनकी प्रॉपर सफाई नहीं हो सकी है।
सेक्टर-6, 7 व 14 में तालाब बनीं सड़कें
मुख्य शहर के अलावा सेक्टर 6, 7 व 14 में भी सड़कें तालाब बनी। पानी निकासी के सिस्टम फेल रहे। डेढ़ से दो-दो फिट पानी सड़कों पर खड़ा हो गया। गलियों की बात करें तो उनकी भी ठीक से सफाई नहीं हुई थी।
शहर के इन क्षेत्रों में ज्यादा जलभराव हुआ
शहर में राजीव पुरम, जनक पुरी, न्यू जनक पुरी, न्यू रमेश नगर, बहादुर चंद कॉलोनी, विकास कॉलोनी, सेक्टर-8, मॉडल टाउन, रेलवे रोड, देवी मंदिर रोड, बस स्टैंड रोड, महिला आश्रम रोड, शिव कॉलोनी, शास्त्री नगर, सब्जी मंडी रोड सहित विभिन्न क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आई।
जहां जलभराव हुआ वह लो लाइन एरिया है: चीफ इंजीनियर निगम
निगम के चीफ इंजीनियर रामजी लाल ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर जलभराव का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सेक्टर-13 में जहां जलभराव हुआ वह लो लाइन एरिया है। इस सड़क को ऊंचा कराया जाएगा। मंडे तक इसका एस्टीमेट तैयार हो जाएगा। इसके अलावा कई स्थानों पर बरसाती नालों के चेंबर के ढक्कन खुलवाए गए, जिससे पानी तेजी से निकास हुआ। एकदम से तेज बारिश आना भी जलभराव का कारण रहा है। कई जगह पर पेड़ों के गिरे सूखे पत्तों आदि से गली अवरुद्ध मिली। सफाई के लिए टीम लगा दी है।
मौसम अपडेट: रक्षाबंधन तक तेज बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार आने वाली 3 अगस्त तक बारिश की संभावना है। मौसम यंत्रों के अनुसार इस अवधि के दौरान बारिश के संकेत दिया गए। अल सुबह से दोपहर ढाई बजे तक चली बारिश व बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आई है। अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बारिश 107.6 एमएम हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगले दिनों में बारिश होने की संभावना है।
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