शहर में पांच बड़ी कंपनियां करोड़ों की बिल्डिंग बना रही है, लेकिन वायु प्रदूषण को रोकने के लिए साइट पर 20 लाख की एंटी स्मॉग गन नहीं लगा रही है। 4 जगहों पर तो फ्लैट बन रहे हैं, एक जगह मेडिकल कॉलेज बन रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत इन सभी को राज्य सरकार से पर्यावरण क्लियरेंस लेना है, जिसके तहत एंटी स्मॉग गन लगाना होगा। लेकिन कोई नहीं लगा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि यहां पर पिछले चार-पांच सालों से कंस्ट्रक्शन चल रहा है। लेकिन अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर (आरओ) के ध्यान में यह सब आया है। आरओ ने सभी पांचाें एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर मशीन लगाने को कहा है। 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट करने को भी कहा है।
इन एजेंसियों को दिए गए नोटिस
- इम्पेरियम रियलिटी प्रा. लि., सेक्टर-1ए : दिल्ली पैरलल नहर के पास आवासीय फ्लैट बन रहे हैं।
- इंद्रप्रस्थ ग्लोबल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन, पुलिस लाइन के सामने : यहां पर मेडिकल इंस्टीट्यूट बनाया जा रहा है। पुलिस के सामने ही जीटी रोड किनारे बड़े स्तर पर कंस्ट्रक्शन चल रहा है।
- तनेजा डिवेलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि., काबड़ी फरीदपुर के पास। यह सेक्टर-37 व 39 एरिया है। यहां पर भी आवासीय फ्लैट बन रहे हैं।
- स्टेंजा डिवेलपर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लिमिटेड : सेक्टर-19 में आने वाला यह एरिया अंसल के नजदीक है। यहां पर भी आवासीय फ्लैट्स बन रहे हैं।
- एम्बिएंस प्रा. लि., एल-4, ग्रीन पार्क एक्सटेंशन, इसका सेक्टर-36, 37 एरिया में आवासीय फ्लैट्स का प्रोजेक्ट है।
20 हजार वर्ग मीटर एरिया में कंस्ट्रक्शन पर ये है प्रावधान
एमसी मेहता बनाम केंद्र सरकार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर 2019 को एक आदेश दिया कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए। जो दिल्ली-एनसीआर में तकनीकी के आधार पर वायु प्रदूषण रोकने के लिए गाइडलाइन तय करे। इसके बाद कमेटी ने तय कर दिया कि 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक कंस्ट्रक्शन एरिया पर कम से कम एक एंटी स्मॉग गन लगानी होगी। इसके लिए स्टेट या केंद्र स्तर पर पर्यावरण क्लियरेंस लेनी होगी।
15 दिन लगाने का आदेश
एचएसपीसीबी के रीजनल ऑफिसर ने इन पांचों एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर में एंटी स्मॉग गन लगाने को कहा है। इस संबंध में मशीन और साइट की फोटोग्राफ के साथ ही अन्य डिटेल ईमेल करने को कहा है।
कैसे कम होता है प्रदूषण
इस मशीन से बड़े स्तर पर पानी के फव्वारे छोड़े जाते हैं। ताकि वायु प्रदूषण कम किया जाए। दिवाली के समय में दिल्ली एरिया में प्रदूषण कम करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
लग सकता है हर्जाना : इन कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए हर्जाना लग सकता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2X1reui