जुलाई के अंतिम दिन जिले भर में झमाझम बारिश हुई। इस बारिश ने जहां रिकार्ड बनाया वहीं सरकारी जल निकासी की व्यवस्था की पोल खोल दी। गुरुवार सुबह 8 बजे से शाम साढ़े चार बजे तक जिले में औसतन 42 एमएम बारिश हुई। सबसे ज्यादा बारिश गोहाना 105 एमएम दर्ज की गई है। यहां पानी के निकासी करने वाले अधिकारियाें के कार्यालय में पानी भर गया।
परिसर में दाे फीट तक पानी जमा हाे गया। गन्नाैर में वकीलाें का चैंबर में जलभराव हुआ तो खरखाैदा में सड़काें पर दाे से तीन फीट पानी नजर आया। सबसे कम आठ एमएम बारिश राई में हुई। इस जुलाई में अब तक 131.5 एमएम बरसात पूरे जिले में दर्ज की गई है।
गन्नौर : कागजों में साफ होंगे नाले तो शहर में होगा जलभराव
जब नाले कागजों में साफ होंगे तो बारिश में इसी तरह जलभराव होगा। हर साल मानसून से पहले पहले नाला सफाई के जो दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश में ओवरफ्लो होते हैं। गुरुवार सुबह तड़के आई बारिश में भी ऐसे ही हुआ है। पौने दस बजे से करीब साढ़े दस बजे तक 48 एमएम बरसात में शहर के हर कोने में पानी-पानी हो गया।
जलभराव ने नगरपालिका व जनस्वास्थ्य विभाग के दावे की पोल फिर से खोलकर रख दी है। जो हर नाले-नालियों की सफाई पर लाखों रुपए खर्च कर रहे है। इन दोनों विभागों के शहरभर में छोटे-बड़े करीब 33 नाले-नालियां है। जिनकी सफाई अच्छे से नहीं हो पाती है। वहीं, इस संदर्भ में संबंधित विभाग के अधिकारियों का रटारटाया शब्द समस्या का जल्द कराया जाएगा समाधान।
इन चार जगहों के जानिए हालात
- एमसी रोड : रेलवे रोड लगता एमसी रोड पर नालों की सफाई नहीं होने से गंदगी से अटे पड़े है। सड़क जलमग्र हो जाती है।
- रेलवे रोड : जीटी रोड से रेलवे स्टेशन को जोडऩे वाली सड़क पर पानी की निकासी का समाधान करने की बजाय जलभराव की जगह पीडब्ल्यूडी विभाग टाइलें बिछाने में जुटा है।
- गढ़ी झंझारा रोड: शहर के दो वार्डों से लगने के साथ दर्जनभर गांव को जाने वाला गढ़ी झंझारा रोड पर जलभराव रहता है।
- वकीलों के चैंबर: लघु सचिवालय परिसर में वकीलों के पुराने चैंबरों में नाले ओवरफ्लो होने पर पानी भर जाता है। पानी इतना होता है कि चैंबर के अंदर तक चला जाता है।
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