सब्जी मंडी का व्यापार पिछले कई महीने से प्रभावित है। जिले में कोरोना पॉजिटिव केस आने के बाद मंडी को कुछ समय के लिए बंदकर दिया गया था। लेकिन इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से मंडी को लेकर जो नियम बनाए गए उनसे मंडी का कारोबार सुचारू नहीं हो सका। सब्जी मंडी में मासाखोर को बैठने की अनुमति नहीं है।
इसी विकल्प के रूप में मासाखोर अपनी आजीविका को बचाने के लिए मंडी के बाहर सड़कों पर बैठकर सब्जी बेच रहे थे। जिला प्रशासन ने आदेश जारी कर 2 दिन से इनके बैठने पर भी रोक लगा दी है। मंडी आढ़तियों का कहना है कि तीन पुलिसकर्मी शाम को ही मंडी परिसर के बाहर पहुंच जाते हैं और वे रात भर यहीं तैनात रहते हैं। सुबह 2:30 बजे के आसपास पीसीएम की गाड़ी पहुंचती है और इसके बाद वे जो भी मासाखोर मंडी के बाहर बैठना चाहते हैं। उनको नहीं बैठने दे रहे।
आढ़तियों का कहना है कि यह वही लोग हैं जो सब्जी मंडी के अंदर से सामान लेकर बाहर सड़क पर दूर-दूर बैठ कर अपना रोजगार कर रहे थे, अब भीड़ की स्थिति को देखते हुए इनको भी वहां से खदेड़ना शुरू कर दिया गया। इससे पहले मासाखोर मंडी में बैठने की रोक भी लगातार बनी हुई है। कई महीनेे से यह लोग बेरोजगारी की कगार पर बने हैं। अब डीसी ने नए आदेश जारी कर मंडी के बाहर सड़क किनारे सब्जी बेचने वालों पर अंकुश लगा दिया। साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि कोई व्यक्ति इसका पालन नहीं करेगा तब उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
19 जून को खत्म हुआ ऑड ईवन का सिस्टम
मंडी प्रधान सुनील यादव ने बताया कि 28 अप्रैल को सब्जी मंडी में कोरोना केस पाए जाने के बाद मंडी को बंद कर दिया गया था। इसके बाद मंडी को लेकर नए-नए आदेश जारी होते रहे। अब 19 जून को ऑड ईवन का चक्कर खत्म किया गया है। इससे अब सब्जियां खराब होने का खतरा खत्म हो गया है। लेकिन जब तक मासाखोर को और उनकी सब्जी नहीं खरीदेंगे तब तक उनकी सेल वापस नहीं लौट पाएगी। अभी तक मंडी में केवल पास जारी दुकानदारों को ही सब्जी लेने के लिए प्रवेश दिया जा रहा है जबकि यहां बैठकर सब्जी बेचने वाले छोटे 350 लोगों को कोई राहत नहीं मिली है। मजबूरी में यह लोग सड़क किनारे बैठ रहे थे, लेकिन अब प्रशासन ने इनको वहां से भी उठा दिया।
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