सर्दी की दस्तक के साथ ही जिले में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। गांव से लेकर शहर के अस्पतालों तक में सर्दी-जुखाम, सिर दर्द, बुखार के मरीजों की कतारें लगी हुई है। कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहे लोगों को अब मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू का भी खतरा मंडराने लगा है।
जिले में अब तक डेंगू के 9 और मलेरिया के दो कंफर्म मामले मिले हैं। हालांकि स्वाइन फ्लू का कोई कोई केस नहीं आया है। तेजी से बढ़ रहे इन रोगियों से स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चिंता का विषय है। हालांकि विभाग का दावा है कि डेंगू व मलेरिया फिलहाल नियंत्रण में है। विभाग अधिकारी का कहना है कि घरों में कूलर, टंकियों व घरों के बाहर भरे पानी में लार्वा जांच भी किया जा रहा है।
सावधानी बरतें; डेंगू के 9 व मलेरिया के दो केस मिले, एक की मौत हुई
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार अभी तक जिले में डेंगू के 9 केस सामने आ चुके हैं। इसके अलावा डेंगू से एक मौत भी हो चुकी है। मलेरिया के भी दो केस मिले हैं। वहीं इस समय बदलते मौसम में हर घर में खांसी-जुकाम व वायरल बुखार की दस्तक है। ऐसे में डेंगू के केस बढ़ना भी चिंता का विषय है। डॉक्टरों की सलाह है कि लोग भी सामान्य बुखार समझकर लापरवाही बरतने की बजाय जांच जरूर कराएं। इस मौसम में मच्छरों से भी पूरी सुरक्षा जरूरी है। 2018 से अब तक स्वाइन फ्लू के एक भी केस नहीं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018, 2019 के साथ ही इस वर्ष 2020 में अभी तक स्वाइन फ्लू का कोई केस नहीं मिला है। वहीं वर्ष 2017 में स्वाइन फ्लू के 16 कंफर्म केस आए थे।
स्वास्थ्य विभाग चला रहा लार्वा जांच का अभियान
जिले में सितंबर माह तक स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से गांव व शहर में 135975 घरों में लार्वा जांच के अलावा कूलर, टंकियों, गमलों, होदियों व अन्य जगह भरे पानी में लार्वा जांच किए। जिनमें कुल 1187 जगह लार्वा मिलने की पुष्टि हुई। इनमें कुछ को सफाई करने की चेतावनी दी गई तो जो बार-बार कहने पर भी सफाई नहीं की गई तो ऐसे अब तक 500 से अधिक लोगों को नोटिस थमाए गए हैं।
डेंगू-मलेरिया से बचने के लिए बच्चों के साथ ही बड़ों को भी पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए। छतों पर कबाड़ में या कहीं आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का प्रयोग करें। रविवार को क्लीन डे है, इसलिए खुद भी लोगों को घर में कूलर व अन्य जगह की सफाई करनी चाहिए। दूसरे जहां बार-बार कहने पर भी सफाई नहीं होती, वहां उन लोगों को नोटिस भी थमाए जा रहे हैं। हमने ट्रॉमा में फिश हैचरी भी शुरू की है। जिसमें गंबूजिया मछली छोड़ी गई। -डॉ. विशाल राव, जिला मलेरिया अधिकारी।
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