आओ गुनगुना लें गीत वॉट्सएप समूह की ओर से गूगल मीट पर नशाबंदी विषय को लेकर ऑनलाइन नशा विरोधी जागृति कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने नशे की लत को लेकर युवाओं को सावधान किया और देश के भविष्य हेतु नशे से दूरी बनाने का आह्वान किया। पानीपत की आराधना सिंह अनु ने सरस वाणी-वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जय सिंह आर्य नशे की फैल रही दुष्प्रवृत्ति पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि क्या होगा कल भाई, नशे में डूबी जब, इस देश की तरुणाई। प्रख्यात गीतकार विनोद भृंग ने कहा कि नशे में डूबने वालों, नशा तुमको डुबा देगा, तुम्हारी हैसियत क्या है, जमाने को बता देगा, अगर अब भी नहीं संभले, तो दौलत और इज्जत को, ये तुमसे छीनकर दिन में तुम्हें तारे दिखा देगा।
वरिष्ठ कवि हरगोबिंद झांब कमल ने कहा कि जीवन में नशा दो प्रकार का एक हमको महान बनाता है, दूजा गर्त में ले जाता है भक्ति, सेवा, देश-प्रेम का नशा, जीवन को अमर कर जाता है। इनके अलावा इस आयोजन में आराधना सिंह अनु, प्रेमसागर प्रेम नोएडा, कृष्ण निर्मल की रचनाओं को भी तन्मयता से सुना और सराहा गया।
कवियाें ने सुनाई कविताओं के अंश
- केसर कमल शर्मा : फिर खड़ा-खड़ा क्या सोच रहा, तू छोड़ दे अब नशा, हंसते-हंसते जीना सीख, तू जीवन का ले भरपूर मजा।
- संजय जैन ने कहा : जवानी में नशे के कश लगाते हैं बहुत ज्यादा, बुढ़ापे में वही हमको सताते हैं बहुत ज्यादा।
- भारतभूषण वर्मा : नशे की लत लगी जिनको, उन्हें लत से छुड़ाना है, नशा यमराज का खत है, ये ख़त उनको पढ़ाना है।
- अनुजा बाजपेयी : माना कि चाय की आदत खराब है, आज चाय का ही तो रिवाज है, हम भी डूब चुके हैं इसकी आशिकी में, मेरा तो नशा चाय का बड़ा बेहिसाब है।
- नीरज द्विवेदी : धूम्रपान संग मयखाना जाना छोड़ प्यारे, जिंदगी को हीर-शमशीर मत बनाइए।
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