लोगों को बेहतर गुणवत्ता की मिठाई उपलब्ध करवाने के लिए फूड सेफ्टी एण्ड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से एक अक्टूबर से नए प्रावधान लागू कर दिए हैं। मतलब अब मिष्ठान भण्डार संचालक को काउंटर के भीतर मिठाई रखने से पहले प्रत्येक मिठाई की ट्रे पर उसकी एक्सपायरी डेट लिखनी होगी। इससे ग्राहक को देखते ही पता चल जाए कि उक्त ट्रे में रखी मिठाई को वह कब तक खा सकता है, लेकिन इन नए प्रावधानों का जिले में खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है।
वहीं इस फैसले से अभी मिठाई विक्रेता नाराज हैं और कोरोना काल के चलते आई मंदी के कारण इस तरह के फैसले को लागू ना करने की बात कह रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एफडीए विभाग की ओर से इस नए कानून के बारे में मिठाई विक्रेताओं को जानकारी देने के लिए एक वर्कशॉप भी बुलाने का फैसला लिया है। सोमवार को इसे लेकर एफडीए कार्यालय में बैठक की जाएगी, जिसमें कानून के फायदे और उसे लागू करने की एहतियातों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
फिलहाल बाजार के हालत ये है कि मिठाई बेचने वालों ने अभी तक मिठाई की एक्सपायरी डेट अंकित नहीं की है। साथ में विभाग की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। इतना ही नहीं मिठाइयों पर गलत निर्माण तिथि और उपयोग की अवधि (बेस्ट बिफोर) एक्सपायरी डेट अंकित नहीं करने वाले व्यापारियों पर इसके लिए किचन से लेकर दुकान तक खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से निरीक्षण भी किया जाना था।
सेहत से नहीं हो खिलवाड़
कई बार लोगों तक खराब मिठाई भी पहुंच जाती है। इससे उनके पेट खराब होने की शिकायतें आती हैं। इसका एक बड़ा कारण मिठाईयों के बनने एवं खराब होने की तिथि अंकित नहीं होना है। अगर लोगों को इसकी जानकारी दुकान पर ही मिल जाएगी। उनको किसी से पूछना भी नहीं पड़ेगा कि उक्त मिठाई कब बनी है। उपभोक्ताओं की सेहत को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नए मानक तय किए हैं। इन नए नियमों से मिष्ठान भण्डार संचालकों को थोड़ी परेशानी होना लाजिमी है, लेकिन इससे लोगों की सेहत की सुरक्षा हो सकेगी। अगर उक्त जानकारी अंकित नहीं मिलती है तो जुर्माने का भी प्रावधान है।
ये है केंद्र सरकार की नई गाइड लाइन
इस बारे में केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार स्पष्ट है कि कारोबारी जो मिठाइयां बिक्री कर रहे हैं, उनके बनने और उपयोग की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित करनी है। यह तिथि डिब्बे व मिठाई ट्रे पर अंकित करते हैं तो बहुत अच्छा है। इसके अलावा काउंटर में रखी रहने वाली मिठाई ट्रे पर तो अंकित करना ही है। अगर कही उक्त जानकारियां नहीं लिखी हुई हैं तो ग्राहक खाद्य निरीक्षक से इसकी शिकायत भी कर सकता है, कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है।
ये बोले मिठाई विक्रेता
फैसले पर करें पुनर्विचार
काेराेना काल में सभी हलवाई पहले ही मंदी की मार झेल रहे हैं। इस बार पहले की तरह त्योहारी सीजन वाली बात भी नहीं है। मिठाइयों का बाजार बुरी तरह से पिटा हुआ है। ऊपर से नए आदेश और लागू कर दिए गए हैं। इस तरह के आदेश को अभी लागू करने से पहले बाजार के हालातों को भी जांच लेना चाहिए। इस तरह से व्यापारियों को सिर्फ परेशान किया जा रहा है। -सुरेश गुप्ता, पूर्व प्रधान, हलवाई एसोसिएशन।
फैसले का गलत असर पड़ेगा
बाजार में त्योहारों के समय में कई छोटे दुकानदार भी मिठाई बेचते हैं। ऐसे में उनपर भी इस तरह के फैसले का गलत असर पड़ेगा। अब इस नए आदेश से स्टोर में किसी ने सामान नहीं रखा तो वह महंगा भी हो जाएगा। जो रसगुल्ला अभी 120 रुपए तक मिलता है उसी के दाम 250 रुपए तक चले जाएंगे। स्टोर के चलते ही मिठाई को अच्छे से सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे में डेट लिखने का कोई औचित्य नहीं है। -श्याम सुंदर नागपाल, पूर्व वरिष्ठ उपप्रधान, हलवाई एसोसिएशन।
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