देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी फैडरेशनों के आह्वान पर भाजपा सरकार की किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में 26 नवंबर को होने वाली देशव्यापी हड़ताल में जिले से हजारों मजदूर, कर्मचारी व अन्य संगठन शामिल होंगे। यह एक ऐतिहासिक हड़ताल होगी। हड़ताल में निर्माण, भट्ठा मजदूर, आंगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील, वर्कर्स, वन मजदूर, ग्रामीण चौकीदार, ग्रामीण सफाई कर्मी, फैक्ट्री मजदूर व केन्द्र व राज्य सरकार के अधीन सभी कर्मचारी व रिटायर्ड कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे।
ये बात सीटू के जिला संयोजक सुमेर सिंह व रोशनलाल ने बेरला, पिचौपा खुर्द आदि गांवों में मजदूरों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश सरकार ने कोरोना का बहाना बनाकर पूंजीपति घरानों की सेवा के लिए रेलवे, बैंक, बीमा, प्रतिरक्षा, कोयला, बिजली समेत तमाम सार्वजनिक क्षेत्र को कोडिय़ों के भाव पूंजीपतियों को लुटाने का फैसला कर लिया हैं।
मजदूर व कर्मचारियों के लिए बने श्रम कानूनों को खत्म करके जंगलराज कायम किया जा रहा हैं। हड़ताल के माध्यम से किसान, मजदूर विरोधी कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये लागू करने, परियोजना कर्मियों, ग्रामीण चौकीदार, ग्रामीण सफाई कर्मचारी समेत सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, निर्माण मजदूरों के कानून को लागू करने, मनरेगा मे दो सौ दिन काम, छह सौ रुपये दिहाड़ी लागू करने, आयकर दायरे से बाहर सभी लोगों को 7500 रुपये मासिक आर्थिक मदद देने समेत अन्य मांगों को उठाया जाएगा। इस अवसर पर विजय कुमार, गजेंद्र, कुलदीप, रामकिशन, बिल्लू, सुमित्रा, अनिता, बिमला, मीना, खजानी, संतोष आदि मौजूद थे।
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