कोरोना महामारी के डर से अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को स्कूलों में नहीं भेज रहे हैं। इसके चलते स्कूलों में कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या का आंकड़ा नहीं बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार कक्षाओं में 40 प्रतिशत विद्यार्थी ही पहुंच रहे हैं। जबकि शिक्षा विभाग ने नौंवी से 12वीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को स्कूलों में बुलाने के आदेश दिए हुए हैं। विद्यार्थियों को स्कूल में लेकर आने को लेकर अधिकारियों ने अब प्राचार्य और शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की है।
शिक्षक स्कूल में नहीं आने वाले बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उन्हें महामारी से बचने को लेकर स्कूल में की गई व्यवस्थाओं की जानकारी देंगे। ताकि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सके।
शिक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर से स्कूलों में कक्षाएं शुरू करवाने की तैयारी कर दी थी। विभाग द्वारा नोटिफिकेशन जारी नहीं करने के कारण कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई थी। नौंवीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी स्कूलों में केवल परामर्श लेने ही आ रहे थे।
शिक्षा विभाग ने दो नवंबर से इन कक्षाओं की नियमित रूप से कक्षाएं लगाने की अनुमति दे दी। विभाग की मंजूरी मिलने के बाद शिक्षकों ने विद्यार्थियों को व्हट्सअप ग्रुपों में कक्षाएं शुरू होने के बारे में सूचना भेज दी थी। शिक्षकों की सूचना के बावजूद भी स्कूलों में विद्यार्थियों की हाजिरी नहीं बढ़ रही है। जिला में कोरोना महामारी का संक्रमण बढ़ रहा है। महामारी के डर से अभिभावक भी सुरक्षा के लिए अपने बच्चों को स्कूलों में नहीं भेज रहे हैं। हालांकि स्कूल में आने वाले विद्यार्थियों के गेट पर हाथ सैनिटाइज और शरीर का तापमान देखने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके बावजूद भी विद्यार्थियों का आंकड़ा नहीं बढ़ रहा है।
स्कूलों में नौंवी कक्षा से 12वीं की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। इस बारे में व्हट्सअप ग्रुपों द्वारा विद्यार्थियों को भी बार-बार सूचित किया जा रहा है। स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कुछ कम है। सभी विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए स्कूल में लाने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है। सरोज बालयान, बीईओ, गोहाना।
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