कोरोना संक्रमण के चलते मार्च में हुए लॉकडाउन के बाद से अब तक पिछले साढ़े 7 महीने से जिला परिषद की सामान्य बैठक नहीं हुई है। चेयरमैन राजेश कस्वां द्वारा बैठक नहीं बुलाने से नाराज 8 पार्षदों ने बीते 2 नवंबर को जिप सीईओ को ज्ञापन सौंपकर मीटिंग बुलाए जाने की मांग की थी। लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक बैठक नहीं बुलाई गई है।
पार्षदों कामरेड रामचंद्र सहनाल, विजेंद्र सिवाच, नीटू गिल, अनिल गोरछिया, गीता नागंली, युक्ति चौधरी व सतपाल शर्मा ने सीईओ को दिए ज्ञापन में कहा था कि चेयरमैन ने प्रोसिडिंग में गड़बड़ी करवाकर 7 करोड़ की ग्रांट अपने व अपनी पत्नी के वार्ड में खर्च कर ली है। जबकि 6 मार्च की बैठक में उन्होंने कहा था कि वह सभी पार्षदों को बराबर ग्रांट वितरित करेगा।
प्रत्येक 4 महीने बाद बैठक बुलाने का है नियम
सत्ता पक्ष का चेयरमैन होने के बाद भी जिला परिषद की बैठक पिछले साढ़े 7 महीनों से नहीं हुई है। जबकि नियम कहता है कि हर 4 महीने के बाद जिला परिषद की सामान्य बैठक आयोजित की जानी जरूरी है। क्योंकि जिला परिषद से पंचायत व मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसे महत्वपूर्ण विभागों सहित 30 विभाग जुड़े हुए हैं।
यहां बता दें कि 6 मार्च को आयोजित हुई बैठक में पार्षदों ने चेयरमैन को ग्रांट वितरित करने का अधिकार सर्व सहमति से दिया था। लेकिन अब पार्षदों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ उस बैठक के समय मौजूद ग्रांट को वितरित करने का अधिकार चेयरमैन को दिया था। लेकिन चेयरमैन ने प्रोसिडिंग में अफसरों से मिलीभगत कर 2020-21 वित्त वर्ष की ग्रांट वितरित करने का अधिकार चेयरमैन को दिया जाता है यह लिखवा लिया। आरोप है कि प्रोसिडिंग में करवाई गई इसी गड़बड़ी के चलते चेयरमैन ने पिछले 7 महीने में 7 करोड़ की ग्रांट अपने वार्ड में खर्च कर दी। अब बची हुई ग्रांट भी वह अपने तरीके से खर्च करना चाहता है ।
पिछली बैठक में उठे थे भ्रष्टाचार के मामले
6 मार्च को हुई बैठक में कई पार्षदों ने रतिया के मनरेगा एपीओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। जिस पर कमेटी भी गठित की गई थी। इसके अलावा बस क्यू शेल्टरों के मामले की जांच तथा मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों का ऑडिट करवाने का मुद्दा भी उठा था। लेकिन उसके बाद से मीटिंग नहीं होने के चलते सब ठप पड़ा है।
पार्षदों की मांग है तो चेयरमैन को बैठक बुलानी चाहिए : दुड़ाराम
पिछले 8 महीने से मीटिंग नहीं बुलाने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैं तो यही कहूंगा कि यदि पार्षदों की मांग है तो चेयरमैन को बैठक बुलानी चाहिए।- दुड़ाराम, विधायक, फतेहाबाद
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