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Sunday, 22 November 2020

पीजीआई में तीसरे चरण के ट्रायल में किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए प्रबंधन ने लिया फैसला

कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की रोकथाम के लिए पीजीआईएमएस में किए जा रहे तीसरे चरण के ट्रायल में एक हजार वाॅलिंटियर्स को शामिल किया जाएगा। ट्रायल कमेटी की प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर डॉ. सविता वर्मा, को-इंवेस्टीगेटर डॉ. रमेश वर्मा, स्टेट नाेडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी ने फैसला लिया है कि अब 65 वर्ष से अधिक आयु के वाॅलिंटियर्स का ऑडियो विजुअल के माध्यम से सहमति लेने के बाद ही वैक्सीन लगाई जाएगी।

ऑडियो विजुअल से सहमति लेने के दौरान चिकित्सक बुजुर्ग वाॅलिंटियर्स को वैक्सीन लगाने के उद्देश्य व साइड इफेक्ट की संभावनाओं के बारे में भी बताएंगे। यदि बुजुर्ग वाॅलिंटियर्स ऑडियो विजुअल के दौरान सहमति देगा तभी उसे ट्रायल में शामिल कर को-वैक्सीन दवा की डोज दी जाएगी।

ट्रायल कमेटी के अधिकारी ने बताया कि शनिवार से यह व्यवस्था शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है कि यदि ट्रायल के दौरान बुजुर्ग व्यक्ति के स्वास्थ्य को खतरा हो तो परिजन ट्रायल कमेटी पर आरोप न लगा सके। ऐसे ही अन्य कई अंदेशे को देखते हुए व्यवस्था बनाई है। अब सोमवार को पीजीआई में 50 वाॅलिंटियर्स को वैक्सीन की डोज लगाने का लक्ष्य लिया है।

दूसरे चरण के ट्रायल में 16 महिलाओं समेत 80 किशोर, युवा और बुजुर्गों को कोरोना नहीं हुआ। वाॅलिंटियर्स की हेल्थ मॉनीटरिंग कर रहे ट्रायल कमेटी के चिकित्सकों ने लगातार फालोअप लेते रहे। जिसमें किसी भी वाॅलिंटियर्स में कोई साइड इफेक्ट न आने की बात कही गई। डाॅ. रमेश वर्मा ने बताया कि चार माह के अंतराल में एक भी वॉलंटियर कोरोना संक्रमण से ग्रस्त नहीं हुआ और न ही उनमें कोरोना वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट पाया गया है। पीजीआई में ट्रायल कमेटी के लिए ये बड़ी उपलब्धि रही।



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Management decided to avoid any dispute in PGI Phase III trial


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