गांव बंदराना में जगद् गुरु ब्रह्मानंद आश्रम में राज्यस्तरीय कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता आश्रम के संरक्षक स्वामी आत्मानंद सरस्वती रहे और मुख्यातिथि के रूप में नानक चंद आहुजा व कुलभूषण शर्मा ने शिरकत की। गोष्ठी का संचालन डाॅ. प्रद्युम्न भल्ला ने किया।
स्वामी आत्मानंद ने गोष्ठी की शुरुआत करते हुए कहा कि साहित्य सृजन परमात्मा का विशिष्ट उपहार है और साहित्य की संगत हमें आनंद प्रदान करने के साथ-साथ समाज में भी जागृति पैदा करती है। कवि दिनेश बंसल ने कहा मृगतृष्णा का पिंजरा तोड़ के पंछी बाहर आए तो, कस्तूरी भी हासिल होगी खुद के भीतर जाएं तो।
दिलबाग सिंह ने कहा कि कागजों में उलझ कर रह गई है जिंदगी, कलम से दर्दे जिगर कह गई है जिंदगी। डाॅ. प्रद्युम्न भल्ला ने शहीदों को नमन करते हुए अपनी भावनाएं वयक्त की, राष्ट्र प्रेम का इजहार करते हुए पंकज कौशिक ने कहा कि वही है भारत का सरताज, रंग रग जिसकी सदा समर्पित। जिंदगी को बेहतर समझने की अनुभूति सुनीता खुशबू के शेर में देखिए, इंसान स्वभाव समझने लगी, जिंदगी को बेहतर समझने लगी हूं मैं।
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