खोल खंड के गांव हरजीपुर में पक्के रास्ते पर जमा पानी की निकासी के समाधान की मांग पर सीएम विंडो में शिकायत बाद भी निदान नहीं हुआ है। मकानों के आगे जमा पानी के कारण यहां रहने वाले परिवारों के लिए काफी मुश्किल हो रही है। ग्रामीणों ने अब दोबारा सीएम विंडो में शिकायत देकर समाधान किए जाने की मांग की है।
गांव निवासी महिला विनोद देवी, सुमाना यादव, मनीषा, मंजू देवी, मनोज सहित अन्य ने बताया कि उनके मकान पहाड़ के समीप है। ऐसे ऊपरी क्षेत्र में स्थित मकानों सहित अन्य गलियों का पानी उनके मकानों के पास आकर जमा हो रहा है। समस्या के समाधान के लिए उनकी तरफ से पंचायत के साथ बीडीपीओ कार्यालय में भी शिकायत की गई है लेकिन कई माह चक्कर लगाने के बाद भी कोई समाधान नहीं किया जा रहा है।
महिलाओं ने बताया कि उनके मकान लाल डोरा क्षेत्र में होने के बाद भी प्रशासन की तरफ से समस्या के समाधान में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। पहले जिस निजी जमीन पर पानी जाता था वहां पर प्लॉट कटने की वजह से पानी नहीं जा रहा है जबकि एक अन्य रास्ते से पानी की निकासी होने नहीं दी जा रही है।
तत्पश्चात उन्होंने इसकी शिकायत सीएम विंडो में भी दी जिसको दो माह से भी अधिक का समय हो चुका है लेकिन समाधान नहीं हुआ है। अब उन्होंने पुन: शिकायत देकर पानी निकासी का स्थायी समाधान किए जाने की गुहार लगाई है।
दोनों तरफ पहाड़ होने के साथ निजी रास्ते की वजह से है दिक्कत : सरपंच अनीता देवी
यह समस्या काफी पुरानी है जिसको लेकर हमने अपने स्तर पर तमाम प्रयास किए हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। शिकायतकर्ताओं ने पहाड़ के पास मकान बनाए हुए हैं और इसके दो तरफ पहाड़ है जबकि एक निजी रास्ता है। निजी रास्ता का मालिक पानी की निकासी अपने यहां से कराए जाने को लेकर सहमत नहीं है। हमने सीवर लाइन डालने का भी प्रस्ताव दिया है पर मालिक तैयार नहीं है।
इस स्थिति की वजह से पानी निकासी का कोई रास्ता नहीं है। हमने प्रशासन को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया है।
-अनीता देवी, सरपंच, ग्राम पंचायत हरजीपुर।
महिला शक्ति, उड़ीसा की जेठानी व बंगाल की देवरानी ने उठाया है समाधान का बीड़ा
सीएम विंडो में शिकायत देने के लिए पहुंची विनोद देवी एवं सोमना यादव ने बताया कि उनके मोहल्ले में गंदे पानी की वजह से बहुत परेशानी हो रही है। उनकी देवरानी मूलत: उड़ीसा की रहने वाली है जबकि वह पश्चिम बंगाल की है। एमबीए तक की शिक्षा हासिल किए हुए सोमना यादव बताती है कि उनकी भाषा और बाहरी राज्यों की होने की वजह से शिकायतों को शुरूआत में नजर अंदाज ही कर दिया गया।
जब वह समस्या लेकर गांव के लोगों के पास गई तो इस वजह से उन्हें अंडर एस्टीमेट भी किया गया, पर हमने ठान लिया है कि समस्या के समाधान के लिए उन्हें मुख्यमंत्री तक भी जाने पड़े तो वह भी जाएंगी। सोमना की जेठानी अनपढ़ है, ऐसे में वह भी अपनी देवरानी के साथ इस समस्या को लेकर बिना किसी हिचक के सरकारी दफ्तरों तक पहुंच रही है।
उन्होंने माना कि अमूमन उनके राज्यों से ताल्लुक रखने वाली महिलाएं काफी हैं, लेकिन इस तरह की सार्वजनिक समस्याओं को लेकर वह घर से बाहर नहीं निकलती है। इस मामले में उनके पति ने भी उनका साथ दिया है।
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