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Saturday, 9 January 2021

सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल 12 को करेंगे चीनी मिलों में गुड़ शक्कर बनाने के लिए बनाई गई जैग्गरी यूनिटों की शुरुआत

महम, पलवल और कैथल चीनी मिलों के लिए वर्ष 2021-22 का पिराई सत्र ऐतिहासिक होने जा रहा है। क्योंकि इन चीनी मिलों में पहली बार गुड़ व शक्कर बनाए जाएंगे। प्रदेश की किसी भी चीनी मिल में इस तरह के प्रयास पहले कभी नहीं किए गए। इन तीनों चीनी मिलों में पारंपरिक तरीके से गुड़ तैयार किया जाएगा। यह गुड़ पूरी तरह से केमिकल फ्री होगा।

जल्द ही इन मिलों के बाहर गुड़ व शक्कर की बिक्री होते हुए दिखाई देगी। क्योंकि चीनी मिल प्रबंधन ने गुड़ व शक्कर बनाने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। मिल के फैक्ट्री एरिया में जहां पर चीनी तैयार होती है। उसके पास ही गुड़ शक्कर बनाने के लिए महम चीनी मिल में जैग्गरी यूनिट तैयार की है। यहां पर गुड़ शक्कर बनाने की रिहर्सल भी पूरी कर ली गई है। इस यूनिट की क्षमता 2 टन उत्पादन प्रतिदिन की है।

दुकान बनाई जाएगी

महम चीनी मिल के प्रबंध निदेशक जगदीप सिंह ढांडा ने बताया कि जानकारी अनुसार 12 जनवरी को सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल मुख्यालय से जैग्गरी यूनिटों का शुभारंभ करेंगे। महम चीनी मिल यूनिट को चलाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि गुड़ व शक्कर बेचने के लिए महम चीनी मिल के बाहर पेट्रोल पंप के साथ रिटेल शॉप बनाई जाएगी। इस शॉप पर गुड़, शक्कर और चीनी बेची जाएगी।

क्यूब फोर्म में मिलेगा गुड़

गुड़ ग्राहकों को क्यूब फोर्म में मिलेगा। ताकि लोगों को खाते समय गुड़ तोड़ने में परेशानी न हो। क्यूब वाले गुड़ के पैकेट का वजन एक किलोग्राम होगा। लोगों की मांग को देखते हुए सरकार व मिल प्रबंधन ने महम चीनी मिल में गुड़ व शक्कर बनाने की यह नई शुरुआत की है। अभी तक गुड़ व शक्कर के रेट तय नहीं किए गए हैं। जल्द ही गुड़ व शक्कर के रेट भी तय किए जाएंगे।

सभी कुछ रहेगा देसी व आर्गेनिक

गांवों में चलने वाले गन्ना क्रेशरों की भांति मिल में भी सब कुछ देसी रहेगा। यहां बनने वाला गुड़ आर्गेनिक होगा। उसमें किसी तरह केमिकल की मिलावट नहीं होगी। इस यूनिट में उस तरह गुड़ शक्कर तैयार किया जाएगा। जिस तरह खेत में लगाए जाने वाले कोल्हुओं में गुड़-शक्कर तैयार होते हैं।

ईंधन के गुटके मंगवाए

गुड़ शक्कर का पारंपरिक टेस्ट लाने के लिए यहां पर सुकलाई का भी प्रबंध किया गया है। सुकलाई एक खास किस्म का पौधा होता है। उस पौधे को कूटकर और पानी में भिगोकर सुकलाई तैयार की जाती है। मिल में भी ऐसा ही किया गया है। कढ़ाई के नीचे पारंपरिक तरीके से ही आग जलाई जाएगी। अब यहां आग जलाने के लिए ईंधन के गुटके मंगवाए गए हैं।



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शैड जहां बनाया जाएगा गुड़।


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