17 से 19 जनवरी तक होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान को लेकर जिले में सारी तैयारियां मुकम्मल हो गई हैं। अभियान के तहत 0 से 5 साल तक के एक लाख 99 हजार 406 बच्चों को पोलियो प्रतिरक्षण की दवा पिलाई जाने का लक्ष्य है। इसके लिए 843 बूथ और 1492 घर-घर जाने वाली टीमें बनाई गई है, जिनकी निगरानी 152 सुपरवाइजरों द्वारा की जाएगी। इसके अतिरिक्त 71 मोबाइल टीमें भी बनाई गई हैं। बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में जिला टास्क फोर्स की मीटिंग में यह जानकारी उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दी।
डीसी ने बताया कि जनवरी 2010 से प्रदेश में पोलियो का कोई भी केस नहीं हुआ और 11 फरवरी 2014 को भारत पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया था, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान व अफगानिस्तान में अभी भी पोलियो के केस मिल रहे हैं, जिनकी वजह से यहां पोलियो का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि भारत में पोलियो उन्मूलन अभियान बार-बार चलाया जा रहा है। डाॅ. अविरल शर्मा ने बताया कि गत सितंबर में लक्षित बच्चों को पोलियो दवा पिलाने के तहत 1.3 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी कारण से रह गए थे।
अब ऐसे उपाय किए जाएंगे कि कोई भी बच्चा न छूटे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी, शिक्षा विभाग और एनजीओ का सहयोग लिया जाएगा। निगरानी तंत्र को सक्रिय बनाया जाएगा। कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए निर्धारित समय यदि तीन दिन से ज्यादा हुआ तो इसमें 5 दिन भी लग सकते हैं। रैडक्रॉस, एनसीसी व एनएसएस वॉलंटियर्स की मदद अपेक्षित रहेगी। सिविल सर्जन डाॅ. योगेश शर्मा ने कहा कि स्कूल बंद होने से अभी रैलियों का आयोजन करना संभव नहीं है, लेकिन जागरूकता के लिए शहरों में नगरनिगम व नगरपालिका व ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत को जिम्मेदारी दी गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर दोनों का सहयोग लिया जाएगा, इनकी ट्रेनिंग भी करवाएंगे।
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