निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री के नमूनों की टेस्टिंग के लिए निगम परिसर के अंदर पूर्व में स्थापित लैब में मौजूद मशीनों की मरम्मत के बाद अब इन्हें दोबारा कार्यकुशल बना दिया गया है। मरम्मत का कार्य डीआरएस इंजीनियरिंग एंड कैलीब्रेशन सर्विसिस की ओर से किया गया है। भविष्य में सभी तरह के सिविल कार्यों के सैंपल यहां टेस्ट किए जाएंगे।
सामग्री में क्वालिटी हल्की पाई जाने पर ठेकेदार की जवाबदेही तय होगी और उसे सामग्री में बदलाव करने के लिए कहा जाएगा। नगर निगम आयुक्त विक्रम ने बुधवार को बताया कि निगम परिसर में जिस मकसद को लेकर लैब स्थापित की गई थी, उसे दोबारा प्रयोग में ले लिया गया है, ताकि सिविल कार्यों में प्रयुक्त सामग्री की टेस्टिंग के लिए बाहर न जाना पड़ा। इस तरह के कार्यों के सैंपल पहले एनआईटी कुरुक्षेत्र व बहुतकनीकी कॉलेज नीलोखेड़ी में भेजे जाते थे, जिससे धन और समय दोनों लगते थे।
कई बार रिपोर्ट भी स्टैंडर्ड के हिसाब से प्राप्त नहीं होती थी। लेकिन अब इस तरह के सैंपल जेई या एसडीओ की उपस्थिति में व पूरी पारदर्शिता के साथ किए जाएंगे, टाइम और पैसा दोनों की बचत होगी। आयुक्त ने बताया कि अब साइट पर चल रहे कार्यों के मैटीरियल के सैंपल यहां लाएंगे और उनकी टेस्टिंग होगी। जेई या एसडीओ टेस्टिंग करवाएंगे और उसका हिसाब रखेंगे। इस सुविधा से निर्माण कार्यों में क्वालिटी और पारदर्शिता आएगी। कोई भी कांट्रेक्टर मनमर्जी का सामान नहीं लगा सकेगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयुक्त या कोई वरिष्ठ अधिकारी कभी भी लैब में आकर टेस्टिंग के संचालन को चेक कर सकते हैं।
निगम आयुक्त ने बताया कि तकनीकी लैब में टाइलों की क्वालिटी जांचने के लिए कंप्रेसिव टेस्टिंग मशीन, सीसी मसाले की जांच के लिए स्लम्प टेस्ट ऑप्रेट्स मशीन, स्टोन मैटल व बजरी की स्टैंथ वैल्यू निकालने के लिए एग्रीगेट इम्पेक्टर मशीन, सीसी क्यूब्स में मसाला भरकर उसकी स्टैंथ जांचने के लिए हिसाब लगाने की मशीन मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त एक छलनी युक्त शिव शेकर मशीन से बजरी इत्यादि मेटल की ग्रेडिंग निकाली जा सकती है।
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