नगर परिषद की चेयरपर्सन पूनम सैनी के खिलाफ विरोधी पार्षदों द्वारा 108 दिन पहले लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सोमवार को पार्षदों द्वारा मीटिंग में भाग नहीं लेने के कारण गिर गया। प्रधान पूनम सैनी की कुर्सी बच गई। विरोधी पार्षदों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर यह तीसरी मीटिंग थी।
दो बार पहले मीटिंग स्थगित हो चुकी थी, लेकिन तीसरी मीटिंग में भी विरोधी पार्षद अविश्वास प्रस्ताव के लिए जरूरी 21 पार्षद इकट्ठे नहीं कर सके। अब 6 माह तक किसी प्रकार का अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। हालांकि नगर परिषद के चुनाव को ही अब चार माह का समय रह गया है। उससे पहले ही आचार संहिता लग सकती है।
वोटिंग करवाने की जिम्मेदारी जिला परिषद के सीईओ दलबीर सिंह को सौंपी गई थी। तय समय अनुसार सभी अधिकारी सुबह 11 बजे लघु सचिवालय स्थित काॅन्फ्रेंस हॉल में पहुंच गए थे। अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग को देखते हुए लघु सचिवालय में पुलिस बल तैनात किया गया था। डीएसपी धर्मबीर खर्ब खुद मोर्चा संभाले हुए थे।
11 बजते ही एक-एक करके 9 पार्षद काॅन्फ्रेंस हॉल में पहुंच गए, जबकि बाकी बाहर खड़े रहे। मुख्य गेट पर पुलिस कर्मियों ने पार्षदों के आईडी कार्ड चेक किए और उसके बाद ही उन्हें अंदर जाने दिया गया। अविश्वास प्रस्ताव के लिए 21 पार्षदों की संख्या पूरा न होता देख लगभग 10 मिनट बाद ही अंदर गए सभी 9 पार्षद बाहर आ गए।
उसके बाद सभी पार्षद नगर परिषद कार्यालय में चले गए और अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग में भाग लेने के लिए वापस नहीं आए। सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर प्रशासन की तरफ से बाहर अनाउसमेंट करवाई गई कि जिस पार्षद ने चुनाव में हिस्सा लेना है, वह आ सकता है, लेकिन कोई नहीं आया।
प्रशासनिक अधिकारी दोपहर 12 बजे तक इंतजार करते रहे। दोपहर 12 बजे दूसरी बार फिर से अनाउसमेंट करवाई गई, लेकिन कोई पार्षद नहीं आया। इसकी सूचना सीईओ दलबीर सिंह ने डीसी डॉ. आदित्य दहिया को दी और उसके बाद बैठक खत्म कर दी गई।
अविश्वास प्रस्ताव गिरा, फिर भी लेंगे कानूनी राय
आज प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग थी, लेकिन किसी पार्षद ने भाग नहीं लिया। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। मामला पेचीदा होने के चलते फिलहाल कानूनी राय भी ली जाएगी। डॉ. आदित्य दहिया, डीसी, जींद।
शहर में हर वार्ड का विकास करवाया है और आगे भी करवाते रहेंगे। विरोधियों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। शहर में करवाए गए विकास कार्यों की जीत हुई है।
पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नप, जींद।
अंदर गए, लेकिन नहीं लगाई हाजिरी
मीटिंग सुबह 11 बजे शुरू हो गई थी। उसके बाद एक-एक करके पार्षद अंदर आना शुरू हो गए। 9 पार्षद अंदर भी गए, लेकिन किसी ने हाजिरी नहीं लगाई। बाकी पार्षद भी बाहर लाइन में लगे हुए थे, लेकिन बाहर खड़े पार्षदों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। कुछ महिला पार्षद बाहर ही गेट पर इंतजार करती रही। चंद मिनटों बाद अंदर मैसेज दिया गया कि जिसके मोबाइल हो, वह बाहर रखे दे। ऐसे में एक पार्षद मोबाइल बाहर देने आई तो बाकी पार्षद भी बाहर निकल आए।
सीईओ बोले- फिर बैठक स्थगित, अब डीसी लेंगे फैसला
12 बजे तक जब कोई भी पार्षद नहीं आया तो बैठक खत्म कर दी गई। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीईओ ने बताया कि मीटिंग में किसी पार्षद ने भाग नहीं लिया। इस कारण कोरम पूरा नहीं हुआ और बैठक को स्थगित किया जा रहा है। बैठक की प्रोसिडिंग डीसी डॉ. आदित्य दहिया को भेजी जाएगी। आगे वह फैसला करेंगे।
33 साल में 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाली पूनम दूसरी प्रधान
जींद. नगर परिषद के इतिहास में एक महिला को छोड़कर अब तक कोई भी प्रधान 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। 2000 में इनेलो सरकार में पार्षद तेजेंद्र कौर नप की प्रधान चुनी गईं और 5 साल प्रधान रहीं। अब वर्तमान प्रधान पूनम सैनी दूसरी ऐसी प्रधान होंगी, जो 5 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही हैं। इससे पहले 2013 में प्रधान बनी मुकेश का कार्यकाल 30 माह का रहा था।
तेजेंद्र कौर के बाद पूनम सैनी प्रधान हैं, जिनका कार्यकाल 4 साल 8 माह का हो चुका है। नगर परिषद के इतिहास को खंगाले तो आज तक कोई पुरुष 5 साल तक प्रधान के पद पर नहीं रहा। पुरुषों में केवल विनोद आसरी 26 माह तक ही प्रधान रहे। इंद्रसेन गोयल, ताराचंद जिंददल, सुनील कुमार और विनोद आशरी दो-दो बार प्रधान चुने गए, लेकिन 5 साल पूरे नहीं किए।
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