जिले की आधी (0.5)% आबादी की ही कोरोना जांच हो पाई है। अभी 91% टीबी रोगी जांच से दूर हैं। यह खतरनाक है, क्योंकि टीबी मरीज की 100 फीसदी जांच अनिवार्य है। जबकि जिले में कोरोना से जो 7 मौतें हुई हैं, उनमें 3 टीबी के मरीज थे। इसलिए खतरा बड़ा है लेकिन 14 दिनों में जितने सैंपल लिए गए।
इनमें 4.71% लोग कोरोना पॉजिटिव निकले। यानी 1760 सैंपल लिए गए, जिसमें से 83 लाेग पाॅजिटिव मिले हैं। 14 लाख की आबादी वाले पानीपत में अब तक 8 हजार सैंपल हुए हैं। यानी 4 माह में आबादी के 0.57% लोगों की ही सैंपलिंग हुई है। एक्सपर्ट कहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा जांच करके ही कोराेना को हराया जा सकेगा।
जानिए, सैंपलिंग धीमी होने के कारण
1. लैब की कमी सबसे बड़ी बाधा
कोरोना काल के 4 माह बीत गए, लेकिन पानीपत में कोरोना के सैंपल की जांच के लिए लैब नहीं बन सकी। जीटी रोड पर बसे औद्योगिक शहर पानीपत के दोनों ओर करनाल और सोनीपत में लैब है, लेकिन पानीपत आज भी पूरी तरह से सोनीपत के खानपुर अस्पताल पर निर्भर है। लैब की कमी जांच में सबसे बड़ी बाधा है।
2. 4 घंटों की मैराथन प्रक्रिया
सैंपल देने में 4 घंटे की मैराथन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस कारण सैंपलिंग बहुत कम हो रही है। सिविल अस्पताल में जांच कराने को पूरा दिन खराब करना पड़ता है। इसलिए, साधन-संपन्न लोग निजी लैब से जांच करा रहे हैं। अब यह जांच का विषय है कि लोगों को जानबूझकर निजी लैब की अोर धकेला तो नहीं जा रहा।
3. लोकल एड्रेस प्रूफ मांगा जा रहा
जांच से पहले अब लोकल एड्रेस प्रूफ भी मांगा जा रहा है। अगर कोई परिवार किसी अन्य शहर से आ रहा है और कोरोना की जांच कराना चाहता है तो अस्पताल में उससे लोकल आधारकार्ड मांगा जा रहा है। अब भला कर्मचारियों को कौन समझाए कि लोकल आधारकार्ड एक दिन में नहीं बनता है।
4. रैंडम जांच भी बंद कर दी गई
पहले शहर की सनौली रोड स्थित सब्जी मंडी सहित अन्य जगहों पर लोगों की अचानक कोरोना सैंपलिग होती थी। लेकिन वह भी बंद है। टीम तो बनी हुई है, लेकिन कहीं दिखती नहीं। सैंपलिंग कम होने में इसका भी बड़ा रोल है। जबकि केसों को देखते हुए यह प्रक्रिया चलनी चाहिए।
चिंता की बात. टीबी मरीजों की जान खतरे में
सरकार ने 9 जून को ही टीबी मरीज की जांच अनिवार्य कर दी है। लेकिन 18 दिनों में 1750 टीबी मरीजों में से सिर्फ 150 की जांच हुई। ये वे मरीज हैं, जो चलकर स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचे हैं। पुराने मरीज तक तो स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंच ही नहीं पाई है।
सीएमओ डॉ. संतलाल वर्मा बोले-
लैब खुलेगी, तब बढ़ेगी जांच: लैब बनाने की मांग सरकार को भेजी थी, अब तक लैब मिली नहीं है। उम्मीद है कि अगले महीने जांच के लिए पानीपत में लैब बन जाएगी। इसके बाद सैंपलिंग दर अपने आप बढ़ जाएगी।
मोबाइल टीम ले रही है सैंपल: कोरोना की जांच के लिए माेबाइल टीमें भी बना दी गई हैं। यह टीम जिले की सीएचसी व पीएचसी वाइज सैंपल ले रही है। अब तो टीबी मरीज की जांच भी शुरू कर रहे हैं। इसलिए आगे सैंपलिंग दर और बढ़ेगी।
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