कोविड-19 में घर-घर जाकर सर्वे करने के आदेशों पर अध्यापकों ने रोष प्रकट करते हुए खंड विकास पंचायत अधिकारी डहीना में जाकर बीडीपीओ की अनुपस्थिति में ब्लाॅक पटवारी को ज्ञापन सौंपते हुए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
अध्यापक प्रदीप कुमार, बिजेन्द्र सिंह, विरेन्द्र सिंह, विजयपाल सिंह, अनिल कुमार, संदीप कुमार, अरविन्द्र कुमार व सुरेन्द्र कुमार ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी मौखिक आदेशों के अनुसार जारी सर्वे प्रपत्र एवं सर्वे हेतु अध्यापकों की नियुक्ति करना भ्रम की स्थिति पैदा करता है।
सर्वे प्रपत्र अनुसार सर्वे कार्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा वर्करों द्वारा संपन्न किया जाना है न कि अध्यापकों द्वारा। ऐसे में उपरोक्त कार्य न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है। यदि अध्यापकों द्वारा यह कार्य करवाया गया तो इससे बच्चों की आॅनलाइन पढ़ाई बाधित होगी। अध्यापकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि अध्यापकों की गरिमा एवं बच्चों के हितों को ध्यान में रखकर उचित निर्णय किया जाए। इससे पहले भी अध्यापकों ने कोविड-19 के तहत दो बार-बार सर्वे पूर्ण किया है।
उन्होंने कहा कि अध्यापक साथी किसी कार्य से नहीं घबराते एवं कार्य करने की मंशा भी है, लेकिन कार्य विधि अनुरूप न्याय संगत होना चाहिए। अध्यापकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग द्वारा संबंधित डीडीओ, प्राचार्य, मुख्याध्यापक को लिखा जाए ताकि अध्यापकों को ऑन ड्यूटी किया जा सके। प्रपत्र में अनेक ऐसे बिंदु है, जो भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं, इसके लिए ट्रेनिंग दी जाए। सर्वे संबंधी हिदायतें बार-बार न बदली जाए। सर्वे की अवधि कम से कम दो माह रखी जाए, ताकि कार्य उचित प्रकार से संपन्न हो सके। सर्वे संबंधी सामग्री पर्याप्त रूप में एवं समय पर दी जाए। अध्यापकों की सुरक्षा के लिए आश्वासन दिया जाए एवं विशेष सुरक्षा किट दी जाए।
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