इस बार 22 दिन में ही मॉनसून की 127 एमएम बारिश हो चुकी है। जबकि पिछले साल पूरे सीजन में कुल 157 एमएम की बारिश हुई थी। इस साल मॉनसूनी बारिश सामान्य से ज्यादा होने की संभावना है। क्याेंकि अभी अगस्त और सितंबर माह में भी बारिश होने की उम्मीद है। यह बारिश धान की फसल की लाभदायक रहेगी। मॉनसून ने तय समय 25 जून को पानीपत में दस्तक दे दी थी लेकिन शुरुआत कमजोर होने के कारण पहले दिन सिर्फ 1.3 एमएम की बारिश हो चुकी थी। उसके बाद 28 जून को 7 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
मॉनसूनी टर्फ रेखा के हिमाचल की तलहटियों तक पहुंचने के कारण फिर से मॉनूसन पड़ गया। 3 जुलाई को बंगाल की खाड़ी की तरफ से आई पूर्वी हवाआें के कारण मौसम में बदलाव आना शुरू हो गया। 3 जुलाई और 8 जुलाई की देर रात को हुई मूसलाधार बारिश से मौसम का मिजाज बदल गया था। इन दो दिनों में करीब 79 एमएम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद फिर से मॉनसूनी हवाओं का रुख हिमाचल की ओर हो गया। अरब सागर की ओर से नमी लेकर आई हवाओं के कारण पानीपत में फिर से मॉनसून सक्रिय होना शुरू हो गया। हवाओं में ठंडक होने के कारण तापमान में गिरावट आना शुरू हो गया। 18 से 20 जुलाई तक लगातार बारिश होने से राहत मिल गई। 21 जुलाई से मॉनसूनी टर्फ का दबाव फिर से हिमाचल की ओर हो गया। इस कारण तापमान में बढ़ोतरी होना शुरू हो गया। मौसम विभाग के अनुसार 22 दिनों में पानीपत में करीब 127 एमएम बारिश हो चुकी है।
पिछले साल मॉनसूनी की बेरुखी के कारण लोगों का हाल-बेहाल उमस ने कर दिया था। जुलाई, अगस्त और 18 सितम्बर तक नमी 80 प्रतिशत से नीचे नहीं गई। इसका सबसे बड़ा कारण था कि मॉनसूनी टर्फ उत्तराखंड की तरफ बढ़ गया था। वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ डॉ. डीपी दुबे ने बताया कि मॉनसूनी टर्फ के साउथ में अच्छी बारिश होती है। पिछले साल पानीपत शहर ही हरियाणा के अधिकतर मॉनसूनी टर्फ के उत्तर में आ गए थे। इस कारण मॉनसूनी बारिश सिर्फ 157 एमएम हो सकी थी। जबकि सामान्य बारिश करीब 249 एमएम होती है।
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