(राजेश सैनी) शहर में अवैध तरीके से हाॅर्डिंग लगाने का खेल चल रहा है। हाईकाेर्ट के निर्देश पर शहर में 34 यूनिपाेल व इसके अलावा 8 टाॅयलेट इत्यादी के आसपास की साइटस निर्धारित की गई हैं। मगर हालात ऐसे हैं कि आप 34 ताे छाेड़िए 34 साै से ज्यादा जगहाें पर शहर में इन दिनाें हाेर्डिंग्स बैनर व विज्ञापन लगा दिए जाते हैं। जिन पर शहर काे गंदा करने से राेकने काे लेकर जिम्मेदारी दी गई है वे भी मूक दर्शक बने हुए हैं।
हालांकि दैनिक भास्कर इस मामले में पहले भी खुलासा कर चुका है हाेर्डिंग मामले में बड़ा खेल है। यहां हाेर्डिंग लगवाने से लेकर हटवाने तक भ्रष्टाचार का खेल है जिसमें निगम अधिकारियाें से लेकर एक अवैध तरीके से हाेर्डिंग्स लगाने वाले माफिया जुड़े हैं। बड़े सिस्टम से यह पूरी प्रक्रिया चेन सिस्टम की तर्ज पर चल रही है।
दैनिक भास्कर की टीम पिछले चार दिनाें से अवैध काराेबार की तह तक जाने में लगी हुई है मगर खबर छपने से पहले ही इस काराेबार से जुड़े लाेगाें ने पाॅलीटिकल पार्टियाें सहित अन्य तरह के लगे हाेर्डिंग्स उतरवा दिए।
1. जानते सभी हैं पर सख्ती नहीं... सभी अफसरों को पता है कि बड़े कार्यक्रमों से पहले शहर की मुख्य सड़कों को होर्डिंग्स से पाट दिया जाता है, परंतु कार्रवाई कभी नहीं होती। कभी कभार नोटिस दे औपचारिकता कर देते हैं।
2. इतनी बड़ी टीम, कार्यप्रणाली पर सवाल.. निगम की इतनी बड़ी टीम की नाक तले सरेआम सत्ता और विपक्ष के जलसे और रैलियों से पहले बैनरों का कई-कई दिन बिना कार्रवाई लगे रहना कार्यप्रणाली पर सवाल है।
3. लाखों कीे कमाई में कइयों का हिस्सा... शहर में अलग-अलग जगहों पर विज्ञापन का टेंडर 2.70 करोड़ में दिया गया है। ये साइट्स गिनती की हैं। इसके अलावा सैकड़ों जगह होर्डिंग-बैनर लगा माफिया लाखों कूट रहा है।
4. गंदा कर रहे शहर, हादसों का डर... ऐसा नहीं कि ये मामला केवल नफे और नुकसान से ही जुड़ा है। जहां तहां विज्ञापनों ने शहर की खूबसूरती को भी बिगाड़ दिया है। वाहन चालकों का इससे ध्यान भी भटकता है।
कार्यक्रम निपटने के बाद ही जागता है नगर निगम
दरअसल, चार दिन पहले सत्ता पक्ष व विपक्ष के हाॅर्डिंग पूरे शहर में लगाए गए। काेई चाैक चाैराहा, काेई स्ट्रीट लाइट पाेल ऐसा नहीं जहां हाेर्डिंग न लगा हाे। प्लानिंग के तहत ये हाेर्डिंग लगाए गए। हालांकि इनमें से कुछ स्थानाें पर अभी भी हाेर्डिग्स लगे हुए हैं।
निर्धारित कार्यक्रम से पहले इन्हें इन्हें उतारना तो दूर किसी ने इन्हें छुआ तक नहीं। अब जबकि कार्यक्रम हो चुका है तो नगर निगम की टीम दिखावा करती है और हाेर्डिंग उतारने का काम शुरू कर दिया है। हैरानी की बात देखिए कि निगम के पास डिफेसमेंट एक्ट के तहत नाेटिस देकर कार्रवाई करने का अधिकार है।
इसके तहत शहर काे गंदा करने पर एफआईआर दर्ज भी कराई जा सकती है। यहां मगर इसके उल्ट है। निगम अपना स्टाफ लगाकर व गाड़ी का तेल जलाकर इन हाेर्डिंग्स काे उतारने का काम शुरू कर देता है।
तीन साल के लिए 2.70 कराेड़ का दिया गया है एजेंसी काे टेंडर
दरअसल नगर निगम ने शहर में राेड निर्धारित कर एजेंसी काे टेंडर दिया गया है। इस एजेंसी काे निर्धारित शहर के 34 साइट्स पर हाेर्डिंग्स लगाने का अधिकार है। हाेर्डिंग्स लगाने का रेट निगम के मानक पर एजेंसी तय करती है। निगम ने यह टेंडर एक एजेंसी काे तीन साल के लिए 2.70 कराेड़ रुपये में जारी किया है। इन निर्धारित साइटस के अलावा अगर काेई जगह हाेर्डिंग्स लगाता है ताे वह अवैध माना जाता है।
खानापूर्ति के लिए केस दर्ज करने को लिखा
निगम ने इसकाे लेकर एक खेल अलग ही चला रखा है। शिकायत पर या फिर मनमर्जी से निगम अवैध जगह पर विज्ञापन करने पर नाेटिस जारी कर देता है। डराने के लिए निगम पुलिस काे एफआईआर के लिए लिख देता है। पुलिस का दबाव आता है ताे दुकान व हाेर्डिंग लगाने वाले निगम पहुंच जाते हैं। यहां आकर जुर्माना भरकर पीछा छुड़वा लेता है। यानी यह एक तरह से वैध भ्रष्टाचार का काराेबार है।
ये है हाईकाेर्ट की डायरेक्शन
हाई काेर्ट की डायरेक्शन है कि मेन राेड फेसिंग पर काेई भी हाॅर्डिंग नहीं लगाया जाए। क्याेंकि ऐसे में वाहन चालकाें काे जाेखिम है। जब भी वाहन चालक इन मेन राेड से निकलता है ताे हाेर्डिंग्स बैनर उन्हें आकृषित करते हैं और हादसा हाेने का भय है। ऐसे में इन यहां लगाया जाना हाई काेर्ट की के आदेशाें की अवहेलना हाेगी।
अधिकारियों का जवाब.. जल्द नोटिस भिजवाएंगे
अवैध हाेर्डिंग्स काे हटवाना निगम की जिम्मेदारी बनती है। जिनके भी शहर के चाैक चाैराहाें पर हाेर्डिंग्स लगे हैं उनकी रिपाेर्ट संबंधित स्टाफ से मांगी गई है। जल्द ही इन्हें नाेटिस जारी हाेने वाले हैं। हालांकि हाेर्डिंग्स काफी जगह से उतार भी लिए हैं। जाे नहीं हटाए गए हैं उन्हें उतरवाया भी जाएगा।'' -संदीप , एक्सईएन, नगर निगम।
शहर में अवैध हाेर्डिंग्स हाल ही में खूब लगाए गए हैं। हम नगर निगम काे इस मामले पर लिखेंगे कि इन्हें क्याें लगाया गया। फिलहाल लाॅक डाउन के दाैरान से अब तक हमारा काम ठप पड़ा है। निर्धारित साइट्स अभी तक खाली पड़ी थीं। हम तो खुद ही नुकासन झेल रहे हैं'' -धर्मवीर काैशिक, कांट्रेक्टर।
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