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Thursday, 24 September 2020

चाैधरी रणवीर सिंह हुड्डा पार्क में दो महीने से पानी की एक बूंद भी नहीं, हरे-भरे घास के लॉन मुर्झाए, पानी की टंकियां भी सुखीं

शहर के इकलौते विकसित चाैधरी रणवीर सिंह हुड्डा पार्क में 2 माह से पानी की एक बूंद नहीं हैं। पार्क के हरे घास के लॉन सूख गए हैं। पेड़-पौधे भी बिना पानी के प्यासे इन्द्रदेव की मेहरबानी पर हैं। पार्क की देखरेख का जिम्मा संभाल रही नगरपालिका का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। बता दें कि चौधरी रणबीर सिंह हुड्‌डा पार्क नगर का इकलौता पार्क है जो शहर ही नहीं आसपास के गांवों के लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। सुबह-शाम खुलने वाले इस पार्क की देखरेख का जिम्मा नगरपालिका संभाल रही है। पालिका की ओर से पार्क की देखरेख व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर साउटसोर्सिंग प्रणाली के तहत 15 कर्मचारी लगाए हुए हैं जिसमें 4 कर्मचारी गेट पर, 8 माली, दो सफाई कर्मचारी तथा एक इलेक्ट्रिशियन हैं।

ट्यूबवेल बंद होने से पार्क के कई हरे-भरे घास के लॉन सूख गए हैं तो कुछ सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। पेड़-पौधे भी बिना सिंचाई के सूखने लगे हैं। यदि पालिका प्रशासन ने शीघ्र ही संज्ञान नहीं लिया तो नगर के एक मात्र विकसित पार्क का क्या हाल होगा यह समझ सकते हैं क्योंकि अभी तक तो इन्द्रदेव द्वारा बीच-बीच में बरसात करने से पार्क के पेड़-पौधों को जीवनदान मिला। उधर पार्क में बनी दोनों पानी की टंकिया भी सूखी पड़ी हैं जिस कारण सुबह-शाम भ्रमण के लिए आने वाले लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें कि पार्क की देखरेख जा जिम्मा नगरपालिका ने उठाया हुआ है। नगरपालिका हाउस के बीच बीते चार वर्षों से चल रही खींचतान के कारण विकास के मामले में नगर के हालात ही बिगड़े हुए हैं तो पार्क के हालात कैसे अच्छे रह सकते हैं। पार्क कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने तो कभी बिजली का बिल अदा नहीं करने के कारण महीनों पार्क को अंधेरे में रहना पड़ा। टयूबवेल भी एक बार खराब होने के बाद उसे ठीक होने में महीनों इंतजार करना पड़ा।

पार्क में 3 ट्यूबवेल एक भी चालू नहीं
पार्क के अंदर पीने के पानी तथा पौधों में पानी देने को लेकर तीन टयूबवेल बनवाए गए थे। वर्तमान में तीनों टयूबवेल बंद पड़े हैं। एक ट्यूबवेल तो काफी वर्षों से बंद है, वहीं दो अन्य टयूबवेल भी बीते करीब दो माह से बंद बताए जा रहे हैं। इनमें से एक टयूबवेल के पानी से पीने की टंकियां भरने तो दूसरा पौधों में पानी देने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है।



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