चौपटा खंड के गांव शक्कर मंदोरी व चाहरवाला के बीच में गिगोरानी माइनर के टूटने से करीब 30 एकड़ में नई बिजाई की हुई सरसों की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई। किसानों ने इसकी सूचना सिंचाई विभाग को दी सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पीछे से नहर को बंद करवाकर दरार को पाटने का काम शुरू किया।
गौरतलब है कि यह नहर लगातार पांचवीं बार टूटी है जबकि नहर की रि-मॉडलिंग किए हुए करीब डेढ़ वर्ष हुआ है। बार-बार नहर टूटने के मामले की किसानों ने जांच की मांग की है। इससे पहले पहली बार जब 19 जुलाई को जब नहर में पानी आया था तब पानी आते ही नहर टूट गई। इसके बाद लगातार चार बार टूट गई। बार-बार रि-मॉडलिंग की गई। नहर टूटने से अंदेशा जताया जाता है कि रि-मॉडलिंग के समय सही निर्माण सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया।
नहर टूटने से जहां किसानों की फसल बर्बाद हुई है वही गिगोरानी, जसानियां आदि गांव में फसल सिंचाई के अभाव में सूखी रह गई है। किसान रोहताश, सुरेंद्र सिंह, राकेश कुमार, कृष्ण कुमार, मदनलाल, मुकेश, रामनिवास, ओमप्रकाश आदि किसानों ने बताया कि अभी बिजाई की गई सरसों की फसल मैं पानी भरने से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। शक्कर मंदोरी के पूर्व सरपंच दयाराम सहारण ने बताया कि जब भी नहर में पानी आता है। तो नहर टूट जाती है। उन्होंने कहा कि नहर को नया बनाया बनाया गया है जिसमें लगता है कि सही मटेरियल नहीं लगाया गया।
उन्होंने बताया कि नहर टूटने से उनकी फसल तो बर्बाद हो ही गई आगे गांवों में पानी नहीं गया, जिससे अगले गांवों में जिन किसानों की पानी की बारी थी उनकी फसल सूखी रह गई। किसानों ने नहर टूटने की सूचना सिंचाई विभाग को दी सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने नहर की दरार को पाटने का काम शुरू कर दिया है। इस बारे में सिंचाई विभाग के जेई अनिल हंस से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गिगोरानी माइनर टूटने की उन्हें सूचना मिली। उन्होंने उसी वक्त पीछे से नहर में पानी बंद करवा कर दरार को पाटने का काम शुरू करवा दिया। नहर की दरार को पाटने के बाद नहर में पानी शुरू कर दिया जाएगा।
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