किसान आंदोलन का असर रोडवेज में देखने को मिला। इस दौरान किसी को भी नहीं पता था कि रोडवेज बसें बंद हो सकती हैं। लेकिन सुबह 11 बजे जैसे ही एसपी व डीसी का पत्र जारी हुआ कि बसें बंद कर दी जाएं। इसके बाद अचानक रोडवेज की बसें बंद कर दी गईं। इसके बाद यात्रियों को काफी देर तक कुछ समझ में नहीं आया कि आखिर बसें बंद क्यों हुईं। इसके बाद बस स्टैंड परिसर में यात्री इधर से उधर भटकते रहे। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बसें बंद होने के बाद यात्रियों के लिए बस स्टैंड परिसर के बाहर से प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ा और इस दौरान यात्रियों की भीड़ ज्यादा होने के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक जाने में काफी परेशानी हुई। रोडवेज ने जैसे ही बस सेवा बंद की तो बस स्टैंड परिसर के मेन गेट को ताला लगाकर बंद कर दिया गया। इसके बाद यात्री एक दूसरे से पूछते रहे कि बसें बंद क्यों हुई है। 6 घंटे बाद शाम 5 बजे बस सेवा बहाल हो सकी। इसके बाद ही यात्रियों को थोड़ी बहुत राहत मिली। बसें बंद होने के बाद भी काफी यात्रियों ने बस स्टैंड परिसर में ही बैठकर बसों का इंतजार किया।
ऐसे रहे दिनभर हालात
सुबह 11 बजे बसें बंद की गईं और इसके बाद जो बसें दूसरे डिपो की थी वह बाहर से चली गईं और जींद डिपो की बसें सीधी वर्कशॉप में जाकर खड़ी कर दी गईं। इसके बाद पंजाब रोडवेज की बसें भी बाहर खड़ी हुईं। जिससे यात्रियों को राहत मिली।
पानीपत जाना था नहीं मिल रहीं बसें
बस स्टैंड परिसर आए तो पता चला कि बसें नहीं चल रही है। जिसके बाद बस स्टैंड परिसर के बाहर खड़े होकर प्राइवेट वाहन का इंतजार कर रहे है। पानीपत के जाना था। अभी तक बस नहीं मिली। अलोक, यात्री।
किसान आंदोलन के चलते बंद की गई बसें
किसान आंदोलन के चलते बसों को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक बंद किया गया। एसपी व डीसी ने पत्र जारी कर बसों को बंद करने की अपील की थी। जिसके बाद ही बसों को बंद किया गया। -बिजेंद्र सिंह, जीएम रोडवेज जींद।
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