जयराम संस्थाओं के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि कुरुक्षेत्र वह धर्मस्थली है जहां न्याय और अन्याय के बीच महाभारत का युद्ध हुआ। इसी युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत युद्ध के समय ही अर्जुन के माध्यम से पूरी सृष्टि को गीता का संदेश दिया। ब्रह्मचारी ने कहा कि वक्त बदला और युग बदले लेकिन मानव समाज के लिए भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद से उत्पन्न महान ग्रंथ गीता का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि यह अपने आप में आलौकिक है और मानव जीवन का वास्तविक दर्शन है। जयराम विद्यापीठ ट्रस्टियों तथा विद्यापीठ से जुड़े लोगों के साथ मीटिंग में ब्रह्मचारी ने कहा कि वर्तमान में समाज को अगर बचाना है तथा सामाजिक समस्याओं का समाधान चाहिए तो युवाओं को गीता ज्ञान से जोड़ा जाए। गीता को युवाओं के जीवन का अंग बनाया जाए। इस कार्य में धर्मगुरुओं के साथ शिक्षक वर्ग महत्वपूर्ण सहयोग कर सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज में अगर युवाओं को अगर गीता का ज्ञान मिलेगा तो वे जीवन में अपने कर्तव्य को समझकर समाज कल्याण और राष्ट्रहित के मार्ग पर चलेंगे। दुनिया के महानतम ग्रंथों में शामिल भगवत गीता में कई ऐसी बातें कही गई हैं, जिसको अगर अपनी जिंदगी में अपना लें तो जीवन में समस्याएं न के बराबर रह जाएगी। भगवत गीता-अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण के बीच वो वार्तालाप अर्थात उस बातचीत पर आधारित है, जो महाभारत के समय हुई थी। इस बातचीत में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को धर्म-अधर्म के बीच का अंतर बताते हैं।
आज धर्म सिर्फ पूजा करने तक रह गया है, लेकिन धर्म की असली परिभाषा है जीवन शैली और उसमें अपनाए जाने वाले संस्कार हैं। ब्रह्मचारी ने विद्यापीठ के सभी सदस्यों तथा कार्यकर्ताओं से कहा कि विद्यापीठ में आने वाले अतिथियों का पूरा सेवाभाव से सम्मान करें। इस अवसर पर केके कौशिक, श्रवण गुप्ता, टेक सिंह लौहार माजरा, राजेश सिंगला, खरैती लाल सिंगला, ईश्वर गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, मुनीष मित्तल, संजीव गर्ग, केसी रंगा, सतबीर कौशिक व रोहित कौशिक इत्यादि भी मौजूद थे।
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