सहनशीलता सबसे बड़ा धर्म है : मुनि पीयूष - OTA BREAKING NEWS

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Friday, 20 November 2020

सहनशीलता सबसे बड़ा धर्म है : मुनि पीयूष

पीयूष मुनि महाराज ने श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में कहा कि आत्मा एक ऐसा तत्व है, जिसके स्वभाव और गुण को समझकर धर्म को भी समझा जा सकता है। आत्मा का स्वभाव स्थाई होता है। सांप्रदायिक होने से व्यक्ति धार्मिक नहीं हो सकता। धार्मिक होने के लिए व्यक्ति को बड़ी लंबी साधना करने की जरूरत पड़ती है और सद्गुणों को जीवन में धारण करना पड़ता है। सहनशीलता धर्म का प्रमुख लक्षण है।

सच्चे अर्थों में धार्मिक बनना बहुत मुश्किल है। कर्मक्षेत्र में धार्मिक बने रहना प्रत्येक व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता। सहनशीलता के आने से क्रोध अपने आप ही दूर हो जाता है। सहनशीलता सबसे बड़ा धर्म है। मुनि ने कहा कि सहनशीलता सभ्यता एवं शिष्टता का सबसे बड़ा परीक्षण है। दूसरे के गलत व्यवहार और किसी नुकसान से उत्तेजित होकर व्यक्ति सहनशीलता को खो बैठता है, परंतु वह यह भूल जाता है कि सहनशीलता को खोना ही सबसे बड़ी हानि है। अन्य नुकसानों की क्षतिपूर्ति करना आसान है, परंतु सहनशीलता के नुकसान की पूर्ति कर पाना बहुत कठिन होता है।

चिड़चिड़े, दुष्ट स्वभाव के लोग भी अपने व्यवहार से दूसरों की शांति को भंग कर देते हैं। बुराई को भी अच्छाई से ही बदला जा सकता है। बुरे लोगों से प्रतिशोध लेने की भावना से तो व्यक्ति अपनी शालीनता, कुलीनता, श्रेष्ठता, उच्चता खाे बैठता है। बुरे व्यक्ति से भी टकराने में अपना ही नुकसान होता है और व्यक्ति स्वयं भी बुरा बन जाता है। इसलिए बुरे व्यक्ति के साथ भी न टकराकर सहनशीलता पूर्वक अपना जीवन बिताएं और अपने आसपास तथा दूर-दराज के परिवेश को भी अनुकूल बनाए रखने में सहयोग दें।



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