बारीक किस्म की धान के रेट में खासी गिरावट होने व निकासी कम होने से किसानों में निराशा छाई हुई है। बारीक किस्म की धान का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए इस साल यह धान घाटे का सौदा बन गई है। किसान प्रदीप, तरसेम, रवि, संजीव आदि ने बताया कि इस साल उन्हें बारीक किस्म के दामों में काफी उछाल आने की उम्मीद थी। वहीं इस साल धान की इस फसल की निकासी भी काफी कम हुई है।
इससे किसानों को खासा नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस साल 1509 किस्म की धान 1900 से 2000 रुपए तक बिक रही है। जबकि पिछले साल यही धान 2500 रुपए तक बिका था। उस समय निकासी भी अच्छी थी। वहीं 1121 किस्म की धान 26 सौ रुपए तक बिक रही है। यह पिछले साल 3000 रुपए तक बिका था।
इस साल इस किस्म की धान की निकासी भी 15 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ रह गई है। इस साल बासमती किस्म की धान भी इस साल 4300 रुपए तक ही बिक रही है। जबकि निकासी मात्र 10 क्विंटल ही रह गई है। इससे किसानों को खासा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस बारे में व्यापारी मोहनलाल, अनिल सिंगला, हेमराज आदि ने बताया कि 1121 और 1509 किस्म की धान का चावल निर्यात किया जाता है।
विदेश में डिमांड हुई कम
बाहरी देशों की मांग के आधार पर ही इन किस्मों के दाम तय होते हे। इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते विदेशों की अर्थव्यवस्था काफी कमजोर हो चुकी है। वहीं अभी तक पिछले साल का चावल भी बंदरगाह पर अटका पड़ा हुआ है। इन कारणों से धान के दामों में तेजी नहीं आई है। इसके अलावा बासमती किस्म की धान की लागत भारत में भी है। इसलिए बासमती के दामों में तेजी है।
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