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Friday, 1 January 2021

कोरोना इफेक्ट: 1.46 लाख स्टूडेंट ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी में लिया दाखिला

कोरोना काल में हरियाणा के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या करीब 1.46 लाख बढ़ गई है। इनमें 90,254 लड़के और 55806 लड़कियां हैं। सबसे अधिक 11वीं कक्षा में 35,598 विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है, जबकि हिसार में 13227, फरीदाबाद में 9798, भिवानी में 9589, जींद में 9295 विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों की ओर रुख किया है।

बड़ी संख्या में लड़कियों ने भी सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है। अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 22 लाख से अधिक हो गई है। प्रदेश के निजी और सरकारी दोनों स्कूलों में करीब 51 लाख विद्यार्थी पहली से 12वीं कक्षा तक पढ़ते हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पढ़ाई का स्तर अच्छा होना है।

प्रदेश में कुल 51.41 लाख स्टूडेंट्स
सरकारी स्कूलों में वर्ष 2019 में विद्यार्थियों की संख्या 20.60 लाख के करीब थी, अब 1.46 लाख विद्यार्थियों और एडमिशन लेने से यह आंकड़ा 22 लाख के पार पहुंच गया है, जबकि निजी स्कूलों में वर्ष 2019 में करीब 30.81 लाख विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। निजी और सरकारी स्कूलों को मिलाकर प्रदेश में करीब 51.41 लाख विद्यार्थी पहली से बारहवीं कक्षा में पढ़ाई करते हैं।

2018 के मुकाबले 2019 में भी बढ़े थे
कोरोना से पहले वर्ष 2019 में भी विद्यार्थियों की संख्या सरकारी स्कूलों में बढ़ी थी। सरकारी शिक्षा तंत्र पर जन विश्वास बढ़ा है। एजुसेट के जरिए घर-घर प्रसारण कराए, विद्यार्थियों को किताबें बांटी, अवसर मोबाइल एप से स्टूडेंट्स को काफी लाभ हुआ है। सुपर-100 के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों ने जेईई, एनईईटी जैसी परीक्षा पास की हैं।

संस्कृति मॉडल स्कूल बनाए
प्रदेश में 136 नए राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल बनाए हैं। 1487 कलस्टर स्कूलों को साइंस विद्यालय बना रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की योजनाओं को लागू किया जा रहा है।
-कंवर पाल गुर्जर, शिक्षा मंत्री।

कोरोना में स्कूल बंद रहना भी बड़ा कारण
जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी में कराया है, उसका सबसे बड़ा कारण कोरोना माना जा रहा है, क्योंकि सरकारी स्कूलों में फीस लगभग न के बराबर है। अधिकांश अभिभावकों के मन में यही रहा कि अबकी बार पढ़ाई नहीं होनी तो विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाना सही होगा। इससे सालभर की फीस की बचत होगी।



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फाइल फोटो


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