जिलेभर की 30 खेल नर्सरियां पिछले 9 माह से कोरोना महामारी के कारण बंद पड़ी हैं। खिलाड़ियाें ने अब बगैर कोच के ही अपने स्तर पर खेलों के अभ्यास करने शुरू कर दिए हैं। अभी तक खेल विभाग की तरफ से नर्सरियां खोलने का कोई मैसेज नहीं आया। हालांकि 20 जनवरी के बाद नर्सरियां खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसको लेकर खिलाड़ियाें ने भी टूर्नामेंट संबंधित जानकारियां मांगी है।
30 नर्सरियों में 750 खिलाड़ी हैं और उनके अभी तक कोई टूर्नामेंट नहीं हो सके हैं। अगर नर्सरियां खुलती भी हैं तो कोच की काफी कमी होगी। जिलेभर में खिलाड़ी अपने से सीनियर खिलाड़ियाें से टिप्स लेकर ही अभ्यास कर रहे हैं और फिर कोच के पास वीडियो बनाकर भेजी जा रही है। टूर्नामेंट शुरू होने को लेकर खिलाड़ियाें में काफी उत्साह बना हुआ है। 9 माह से कोई टूर्नामेंट नहीं होने से खिलाड़ी काफी उदास हो चुके हैं। कोच को भी अच्छे खिलाड़ियाें को परखने के लिए कहा गया है, लेकिन बगैर टूर्नामेंट के खिलाड़ियाें को परखना काफी मुश्किल काम है।
स्कूल खुलने के बाद नर्सरियां खुलने की उम्मीद
स्कूल खुल चुके हैं और नर्सरियां स्कूलों को दी गई हैं। इससे उम्मीद है कि जल्द ही नर्सरियां भी शुरू हो सकेंगी। इसके लिए खेल विभाग की तरफ से निर्देश आना है। जो अभी तक नहीं आया। फिलहाल नर्सरियां बंद पड़ी हैं।
अभी तक मुख्यालय से नहीं आया कोई संदेश
कोरोना महामारी के कारण अभी टूर्नामेंट व नर्सरियां बंद हैं। फिलहाल मुख्यालय की तरफ से कोई सूचना नहीं है। जैसे ही कोई सूचना आती है। उस पर काम किया जाएगा।
-विनोद बला, डीएसओ जींद।
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