कस्बा बवानी खेड़ा के 25 गांवों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन पर डेढ़ करोड़ खर्च होने हैं जिस पर काम शुरू हो गया है। कम्पनी के कर्मचारियों ने गोबर व राख को छोड़कर घर-घर से कचरा उठाना शुरू कर दिया है।
तो वही बवानी खेड़ा ब्लाॅक के 33 गांवों में नियुक्त सफाई कर्मचारियों के वेतन पर सालाना एक करोड़ नौ लाख पचास हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
जिनका काम नाले, नालियों सहित गलियों में झाडू लगाना होता है। एक करोड़ खर्च होने के बावजूद कई गांवों में नाले, नालियां कचरे से अटी पड़ी है। दूसरी तरफ ढाई करोड़ रुपये सालाना खर्च की योजना के बावजूद गोबर उठाने का प्रावधान नहीं किया गया है। जगह जगह गोबर युक्त कूड़े कर्कट के ढेर लगे हैं। कितने दिन बाद गोबर के ढेर उठाए जाएंगे। इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया है।
ग्रामीण स्तर पर ज्यादातर घरों में हैं पशु
ग्रामीण स्तर पर देखा जाए तो ज्यादातर घरों में दूध देने वाले पशुओं का रखा जाता है। जहां ग्रामीण सड़कों सहित खाली जगह पर कूड़ा कर्कट के ढेर लगा देते हैं। बवानी खेड़ा के ज्यादातर गांव में गोबर के कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। जमालपुर द्वितीय में तो हांसी तोशाम सड़क पर ही गोबर तथा कचरे का ढेर लगा हुआ है तो वहीं बलियाली में गढ़ी पाना बूस्टर के सामने ढेर लगा हुआ है। इसी प्रकार अन्य गांवों में भी यही हालात है।
बायोगैस प्लांट बनवाने पर मिलता है अनुदान
बीडीपीओ रविन्द्र कुमार व स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के ब्लाॅक कॉर्डिनेटर दिनेश राठी ने बताया पंचायत या कोई नागरिक अपने लेवल प्रति पशु कुछ चार्ज लेकर घर घर से गोबर उठाने की योजना बना सकता है। जिस गोबर से बायोगैस प्लांट लगाया जा सकता है। जिस पर सरकार सब्सिडी भी देती है। जिसकी कमाई से कर्मचारियों सहित अन्य खर्चे निकाले जा सकते हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा गांव बलियाली में छह सफाई कर्मचारियों पर सालाना नौ लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मंगलवार को हुई हलकी बारिस ने सफाई व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। सड़कों तथा मुख्य बाजार के नाले बंद पड़े हैं। नालियों की सफाई ना होने से गलियों में कीचड़ ही कीचड़ हो गया है। अब कचरा कलेक्शन टीम पर 20 लाख रुपये सालाना किए जाने की योजना बनाई गई है।
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