योग भारतीय प्राचीन संस्कृति का मानवता के लिए अमूल्य उपहार है। जो हमें अनुशासित तरीके से जीवन जीने की कला सिखाता है। यह स्वस्थ जीवन का आधार है। इसके बिना हमारा शरीर बेजान सा लगता है। यह बात गांव शेखुपुर दड़ौली के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पतंजलि योग पीठ हरिद्वार के योगाचार्य डॉ. मदन गोपाल आर्य ने विद्यार्थियों को योग व आयुर्वेद के बारे में बताते हुए कही।
उन्होंने बताया कि योग का मतलब वास्तव में एक दो आसन प्राणायाम ध्यान करना नहीं है। बल्कि बुराइयों से दूर रहते हुए अनुशासित जीवन यापन करना है। नियमित ध्यान व प्राणायाम का अभ्यास शरीर में अच्छे हार्मोन उत्पन्न करता है जिससे व्यक्ति हर पल प्रसन्नचित रहता। उन्होंने बताया कि योग गुरू बाबा रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने भारत की प्राचीन संस्कृति योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी को सम्पूर्ण विश्व में प्रचार कार्य किया है। उन्होंने योग, आयुर्वेद, ध्यान, जीवन शैली तथा स्वदेशी के बारे में भी जानकारी दी।
छात्रा प्रियंका ने भी योग का अभ्यास करवाया। इस अवसर पर प्राचार्य सुभाष चंद्र, प्रवक्ता श्रवण कुमार, रमेश, सज्जन खत्री, कृष्ण, सोनिया, सोनू कुमारी, भतेरी देवी, कालू राम, श्रवण कुमार, सुभाष, मुख्य शिक्षक ओमप्रकाश, कृष्ण कुमार, अशोक, वकील कुमार, सुरेंद्र, पूर्णमल, सुनील कुमार, विरेंद्र मौजूद थे।
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