जिला बार एसोसिएशन के सभी अधिवक्तागण मंगलवार काे एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर रहे। इस मौके पर प्रधान सत्यजीत पिलानिया ने बताया कि स्थानीय अदालत पिछले 9 महीनों से सिर्फ जरूरी केसों की ऑनलाइन सुनवाई कर रहे हैं। जबकि कोविड-19 महामारी की वजह से बंद हुए सभी संस्थान खुल चुके हैं और सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। परंतु अदालतों का इस प्रकार से बंद रहना समझ से परे है।
एक तो आमजन भी केसों की सुनवाई न होने के कारण परेशान हैं। लोगों के बड़े जरूरी काम केसों की सुनवाई न होने के कारण अधर में लटके हुए हैं। अधिवक्ता जोकि पूर्णरूप से कोर्ट से होने वाली आमदनी पर ही गुजर बसर करते रहे हैं। इनके साथ-साथ उनके क्लर्क, टाइपिस्ट इत्यादि भी उन्हीं से जुड़े हैं इसलिए सभी को आर्थिक समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जब सभी संस्थान खुल सकते हैं तो फिर भी अदालतें भी खुलनी चाहिए। पांच जनवरी की मीटिंग में कड़ा फैसला लिया गया कि अगर हमारी सुनवाई नहीं होती है तो यह हड़ताल आगे और भी लम्बी चल सकती है। इस बारे में सुप्रीमकोर्ट व हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भी एक रेजुलेशन भेजेंगे। इस अवसर पर पर अधिवक्ता मुकेश गुलिया, अविनाश तंवर, कृष्ण मलिक, पीयूष वर्मा, विनय तंवर, अनिल साहु, अमित ढुल, हरेन्द्र भालोठिया, अन्त दहिया, विकास बुडानियां, देशांत गुलिया आदि मौजूद रहे।
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