किसान सेवा केन्द्र में देश की पहली महिला अध्यापिका सावित्रीबाई फुले के जन्म दिवस पर उसके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया गया तथा उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया।
सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र ने बताया कि सावित्रीबाई फुले हमारे देश की पहली महिला अध्यापिका होने के साथ-साथ महान समाजसेवी भी थी।
उन्होंने ऐसे समय में महिलाओं को शिक्षित करने के कार्य किए जब भारत में जातिवाद और छुआछूत जैसी कुप्रथाओं से समाज जकड़ा हुआ था। सावित्रीबाई फुले की प्रेरणा से नारी शिक्षा को बढ़ावा मिला। उस समय में महिलाओं के लिए उन्होंने स्कूल खुलवाने का कार्य किया। उन्होंने अनेकों संस्थान खुलवाए जिसमें महिलाओं एवं जरुरतमंदों की सहायता की जाती थी। रामोतार ने बताया कि सावित्री बाई फूले ने ऐसे समय में महिलाओं को जागरूक व शिक्षित किया जब महिलाओं को घर से भी बाहर नहीं जाने दिया जाता था।
आज उसके जन्म दिवस पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको याद किया गया। इस अवसर पर सुरेन्द्र आर्य, धर्मेंद्र पहलवान, रवि, दलीप सिंह पूनिया, बंसीलाल व नवीन चौधरी आदि मौजूद थे।वहीं, जेवली गांव ग्राम पंचायत ने भारत की प्रथम महिला अध्यापिका सावित्री बाई फूले की 190वीं जंयती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
सरपंच प्रेम जांगड़ा ने कहा कि सावित्री बाई फूले का जन्म तीन जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ था। उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फूले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका थी। जिसने भारत में पहला स्कूल खोला। स्त्रियों को शिक्षा दिलाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया और अपने पति ज्योतिबा फूले के साथ मिलकर 19वीं सदी में स्त्रियों के लिए अधिकारों, शिक्षा, सतीप्रथा, बालविवाह, छुआछूत एवं अन्य कुरीतियों का विरोध किया। 1848 में पुणे में बालिकाओं के लिए भारत में पहला स्कूल खोला और लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा के अधिकार के साथ अन्य मुलभूत अधिकार दिलवाने की लड़ाई लड़ी।
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